बजरंगबली की भक्ति में डूबा ठोरी पांडेयपुर गांव, गंूजते रहा वैदिक मंत्रोच्चार व जयघोष

ठोरी पांडेयपुर गांव मंगलवार को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया, जब लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में वार्षिकोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, जयकारों और आरती की गूंज से पूरा इलाका आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। गांव का माहौल ऐसा था मानो स्वयं बजरंगबली ने भक्तों के बीच आकर उन्हें आशीर्वाद दिया हो।

बजरंगबली की भक्ति में डूबा ठोरी पांडेयपुर गांव, गंूजते रहा वैदिक मंत्रोच्चार व जयघोष

-- हनुमान मंदिर वार्षिकोत्सव पर भक्ति, आस्था और एकता का हुआ संगम, पूरे दिन भक्तिमय बना रहा माहौल

केटी न्यूज/चौगाईं

ठोरी पांडेयपुर गांव मंगलवार को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया, जब लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में वार्षिकोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, जयकारों और आरती की गूंज से पूरा इलाका आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। गांव का माहौल ऐसा था मानो स्वयं बजरंगबली ने भक्तों के बीच आकर उन्हें आशीर्वाद दिया हो।

सन 1962 में स्थापित यह प्राचीन हनुमान मंदिर न केवल गांव की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह धार्मिक एकता और संस्कारों की विरासत का प्रतीक भी बन चुका है। पांच वर्ष पूर्व इसका जीर्णाेद्धार कर वैदिक विधि से मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। परंपरा के अनुसार हर वर्ष शरद पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। इस बार भी ग्रामीणों ने उसी भक्ति भाव से वार्षिकोत्सव का आयोजन किया, जिससे पूरा गांव एक पवित्र उत्सव का रूप ले लिया।

-- वैदिक विधि से हुआ हवन, गूंजे जयघोष

सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। वैदिक पंडित अंकुश उपाध्याय, बृजकिशोर पांडेय, धर्मदेव पांडेय और उमेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में विधिवत पूजा-पाठ, हवन और आरती का आयोजन किया गया। पंडितों ने बताया कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हवन की लपटों के साथ जब जय बजरंगबली के नारे गूंजे तो वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।

-- प्रसाद, आरती और आस्था का उत्सव

पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग, सभी भक्तिमय उल्लास में सराबोर दिखे। हर चेहरे पर संतोष और भक्ति की झलक साफ नजर आ रही थी। पूरे गांव में हनुमान चालीसा के स्वर गूंजते रहे और शाम को सामूहिक आरती के साथ वार्षिकोत्सव का समापन हुआ।

-- धार्मिक आयोजन से बढ़ी सामाजिक एकता

ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल भक्ति भावना को गहराते हैं बल्कि गांव में आपसी एकजुटता और आध्यात्मिक चेतना को भी बढ़ावा देते हैं। वार्षिकोत्सव के इस पावन अवसर पर ठोरी पांडेयपुर गांव ने यह साबित कर दिया कि जब भक्ति, परंपरा और सामूहिकता का संगम होता है, तो हर गांव तीर्थ बन जाता है।