राजपुर में सियासी परीक्षा में खरे उतरे प्रमुख-उपप्रमुख, अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त

राजपुर प्रखंड मुख्यालय के सभा कक्ष में सोमवार को आयोजित विशेष बैठक में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर रही, लेकिन अंततः प्रमुख मंजू देवी और उप-प्रमुख मजिदन खातून ने बहुमत की कसौटी पर खुद को साबित कर दिया। उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव संख्या बल के अभाव में गिर गया, जिससे विपक्षी खेमे की रणनीति पूरी तरह नाकाम साबित हुई।

राजपुर में सियासी परीक्षा में खरे उतरे प्रमुख-उपप्रमुख, अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त

केटी न्यूज/राजपुर

राजपुर प्रखंड मुख्यालय के सभा कक्ष में सोमवार को आयोजित विशेष बैठक में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर रही, लेकिन अंततः प्रमुख मंजू देवी और उप-प्रमुख मजिदन खातून ने बहुमत की कसौटी पर खुद को साबित कर दिया। उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव संख्या बल के अभाव में गिर गया, जिससे विपक्षी खेमे की रणनीति पूरी तरह नाकाम साबित हुई।प्रखंड विकास पदाधिकारी सिद्धार्थ कुमार की निगरानी में हुई इस अहम बैठक में कुल 26 पंचायत समिति सदस्यों में से महज 15 सदस्य ही उपस्थित हो सके।

अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यक संख्या नहीं जुट पाने के कारण प्रस्ताव स्वतः ही निष्प्रभावी हो गया।परिणाम घोषित होते ही प्रमुख समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और बैठक कक्ष का माहौल उत्साह से भर उठा।दरअसल, बीते दो सप्ताह से प्रखंड की राजनीति में हलचल तेज थी। रसेन पंचायत की बीडीसी राधिका देवी ने प्रमुख पर विकास कार्यों में सहयोग नहीं करने, समय पर बैठक नहीं बुलाने सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद 14 सदस्यों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन देकर अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू की थी।

हालांकि, बैठक के दिन समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आए। राधिका देवी के समर्थन में कई सदस्य मौजूद जरूर रहे, लेकिन संख्या ‘जादुई आंकड़े’ तक नहीं पहुंच सकी। इस कारण विपक्ष का पूरा प्रयास धरा का धरा रह गया।इस घटनाक्रम के बाद प्रखंड की राजनीति में प्रमुख और उप-प्रमुख की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। वहीं, विपक्षी गुट के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका साबित हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक रणनीतियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।