“बचपन को बंधन नहीं, सपनों की उड़ान चाहिए” : बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत प्रशिक्षण आयोजित

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर बाल विवाह मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के प्रांगण में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष काजल झाम्ब ने की।

“बचपन को बंधन नहीं, सपनों की उड़ान चाहिए” : बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत प्रशिक्षण आयोजित

केटी न्यूज/बक्सर

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर बाल विवाह मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के प्रांगण में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष काजल झाम्ब ने की।इस प्रशिक्षण में जिले में कार्यरत आंगनवाड़ी सेविकाएं, आशा कार्यकर्ता, पैरा विधिक स्वयंसेवक, आशा योजना से जुड़े सदस्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम शामिल हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार नेहा दयाल, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह नेत, विधिक सहायता प्रणाली प्रमुख विनय कुमार सिंहा सहित मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। मंच संचालन पैरा विधिक स्वयंसेवक शत्रुघ्न सिन्हा ने किया।प्रशिक्षण सत्र में नेहा दयाल ने बाल विवाह की परिभाषा, भारत में विवाह की कानूनी आयु, बाल विवाह के कारण, इसके सामाजिक दुष्प्रभाव, संवैधानिक प्रावधान, मानवाधिकार तथा इसे रोकने में समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की एवं 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है। इसमें दोषी वयस्क पुरुष को दो वर्ष तक का कारावास अथवा एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।प्रशिक्षकों ने यह भी बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत बाल विवाह मुक्त भारत की प्रतिज्ञा ली जा सकती है, जिससे 2030 तक देश को बाल विवाह से मुक्त बनाने का लक्ष्य है। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से अपराह्न 4 बजे तक चला। इस अवसर पर आशा इकाई के सदस्य, कार्यालय कर्मी एवं बड़ी संख्या में पैरा विधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।