नया भोजपुर पैक्स बैंक घोटाला: आखिर कहां गई दो करोड़ से अधिक की जमा राशि

नया भोजपुर के पैक्स बैंक घोटाला के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े होने लगे है। इस मामले में सहकारिता विभाग की सवालों के घेरे में आ गया है, जबकि एफआईआर दर्ज होने के बाद पैक्स अध्यक्ष तथा संबंधित लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है।

नया भोजपुर पैक्स बैंक घोटाला: आखिर कहां गई दो करोड़ से अधिक की जमा राशि

-- बड़ा सवाल,  विभाग ने वित्तीय वर्ष 2021-22 तक का कर लिया है आडिट, नहीं पकड़ी गई गड़बड़ी

-- जमाकर्ताओं के पैसे से पैक्स अध्यक्ष ने जमा कर ली है अकूत संपति, लंबे समय से नहीं हुआ है पैक्स बैंक का आडिट, सवालों के घेरे में विभाग की कार्यशैली

केटी न्यूज/डुमरांव

नया भोजपुर के पैक्स बैंक घोटाला के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े होने लगे है। इस मामले में सहकारिता विभाग की सवालों के घेरे में आ गया है, जबकि एफआईआर दर्ज होने के बाद पैक्स अध्यक्ष तथा संबंधित लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। बता दें कि नया भोजपुर पैक्स द्वारा जमा वृद्धि योजना के तहत बैंक का संचालन किया जा रहा था। जिसमें पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से  नया भोजपुर के दर्जनों लोगों द्वारा अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा बेहतर भविष्य तथा बच्चों की पढ़ाई व बेटियों की शादी के लिए जमा किया गया था, लेकिन जब समयावधि पूरी हुई तो पैसा देने के बजाय पैक्स द्वारा अपने बैंक में ताला जड़ दिया गया। पिछले वर्ष जब यह मामला तूल पकड़ा था तो नया भोजपुर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के बजाय थाने में ही समझौता कराया गया।

इस समझौते में पैक्स अध्यक्ष मेराज खां ने स्वीकार किया था कि कुछ समय में वे सभी जमाकर्ताओं के पैसे लौटा देंगे, लेकिन इस समझौते के बाद पैक्स अध्यक्ष ने कुछ वैसे चुनिंदे जमाकर्ताओं के ही पैसे लौटाए जिनकी गांव में साख मजबूत थी, जबकि कमजोर तबके के जमकर्ताओं को फटकार लगा भगा दिया गया। हालांकि, पिछले दिनों नया भोजपुर थाने में आयोजित एसपी के जनता दरबार में जब ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह मुद्दा उठाया तो एसपी भौचक रह गए तथा उन्होंने तत्काल नया भोजपुर थानाध्यक्ष को पीड़ित जमाकर्ताओं के सामूहिक आवेदन पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद जमकर्ताओं के आवेदन पर इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। 

-- सवालों के घेरे में आडिटर की भूमिका

बता दें कि इस पैक्स का वित्तीय वर्ष 2021-22 तक अंकेक्षण भी कर दिया गया है, लेकिन ताज्जूब की पैक्स द्वारा संचालित इस बैंक द्वारा इतनी बड़ी गड़बड़ी नजर नहीं आई या फिर मैनेज के खेल में गड़बड़ी को जानबूझकर अनदेखा कर गरीबों की गाढ़ी कमाई का बंदरबाट कर लिया गया। हालांकि, मामला सामने आने के बाद सहकारिता विभाग के आप्त सचिव ने इसके जांच के आदेश दे दिए है। ऐसे में अब देखना है कि क्या विभागीय जांच में इस पैक्स के अंकेक्षण में गड़बड़ी करने वाले अंकेक्षण पर गाज गिरती है या फिर यह जांच भी मैनेज के आंच तले दब जाएगा।

-- जमाकर्ता लगा रहे है कई गंभीर आरोप

बता दें कि नया भोजपुर थाने में अबतक कुल 32 लोगों ने सामूहिक रूप से एफआईआर दर्ज कराते हुए कुल दो करोड़ से अधिक केे राशि के गबन का आरोप लगाया है। वहीं, ग्रामीण सूत्रों की मानें तो पैक्स बैंक द्वारा कई अन्य लोगों की राशि का गबन भी किया गया है, जो अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं कराए है। जानकारों का कहना है कि कई ऐसे भी जमाकर्ता है, जिनके आरडी या एफडी का समयावधि पूरा होने के बाद पैक्स प्रबंधन ने बड़ी चतुराई से उनकी राशि निर्गत करने के नाम पर उनके पासबुक को अपने पास जब्त कर लिया गया।

जिससे वे जमाकर्ता कानूनी कार्रवाई से हिचक रहे है, जबकि कुछ ऐसे भी जमाकर्ता है जो अभी भी पैक्स संचालकों के झांसे में फंसे है, उन्हें उम्मीद है कि पैक्स अध्यक्ष या संचालक उनकी जमा राशि को कुछ दिनों में लौटा देगी। जबकि ऐसे भी जमाकर्ता है जो पैक्स अध्यक्ष से अपने पुराने संबंधों को देखते हुए मुंह बंद किए हुए है। जानकार बताते है कि यदि गहराई से जांच की जाए तो न सिर्फ गबन के शिकार लोगों की संख्या बढ़ जाएगी बल्कि गबन की राशि भी दुगनी हो सकती है।

-- बोले एसडीपीओ, कई बिंदुओं पर हो रही है जांच

इस संबंध में डुमरांव एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने बताया कि सामूहिक एफआईआर दर्ज होने के बाद कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है, मसलन पैक्स द्वारा कितने लोगों से तथा किस मद में पैसा जमा कराया गया था, वह पैसा कहां गया। एसडीपीओ ने कहा कि एफआईआर के अलावे भी जिन लोगों की भूमिका इस घोटाले में पाई जाएगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

बयान

सहकारिता विभाग के आप्त सचिव के निर्देश के आलोक में मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही यह तय हो पाएगा कि पैक्स बैंक द्वारा कितने की राशि का गबन किया गया है। फिलहाल इस मामले में पैक्स अध्यक्ष, बैंक प्रबंधक, एजेंट के अलावे पूरी समिति की भूमिका की जांच व दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। - चंद्रमा राम, जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर