बच्चों की कल्पनाओं को मिले नए पंख, ‘बकरी अब पढ़ने चल’ के बहाने गूंजा साहित्य का स्वर

डुमरांव में शनिवार को साहित्य, शिक्षा और सृजनशीलता का अनूठा संगम देखने को मिला, जब प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), बक्सर के तत्वावधान में स्थानीय महारानी उषा रानी बालिका उच्च विद्यालय परिसर में बाल साहित्यकार एवं शिक्षिका डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ की नवीन काव्य पुस्तक ‘बकरी अब पढ़ने चल’ का लोकार्पण किया गया।

बच्चों की कल्पनाओं को मिले नए पंख, ‘बकरी अब पढ़ने चल’ के बहाने गूंजा साहित्य का स्वर

--बाल साहित्य को समाज परिवर्तन का माध्यम बताते हुए कवियों ने रचनाओं से बांधा समां, डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ की पांचवीं पुस्तक का हुआ लोकार्पण

केटी न्यूज/डुमरांव।

डुमरांव में शनिवार को साहित्य, शिक्षा और सृजनशीलता का अनूठा संगम देखने को मिला, जब प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), बक्सर के तत्वावधान में स्थानीय महारानी उषा रानी बालिका उच्च विद्यालय परिसर में बाल साहित्यकार एवं शिक्षिका डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ की नवीन काव्य पुस्तक ‘बकरी अब पढ़ने चल’ का लोकार्पण किया गया। पुस्तक विमोचन के साथ आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा, समाज और मानवीय संवेदनाओं के विभिन्न आयामों को स्वर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अरुण मोहन भारवि ने की, जबकि स्वागत भाषण प्रलेस के उपसचिव सह प्राध्यापक डॉ. मनीष कुमार ‘शशि’ ने दिया।

संचालन करते हुए प्रलेस के जिलाध्यक्ष डॉ. बी.एल. प्रवीण ने डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह उनकी पांचवीं प्रकाशित पुस्तक है। उन्होंने बताया कि बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए डॉ. मीरा को देशभर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।डॉ. प्रवीण ने कहा कि हाल ही में उन्हें जनहित परिवार, भोजपुर द्वारा जनहित साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद शिक्षक शिरोमणि पुरस्कार, विद्या वाचस्पति, भारत गौरव सम्मान तथा रामवृक्ष बेनीपुरी शिखर बाल साहित्य सम्मान जैसे सम्मान उनकी उपलब्धियों में शामिल हैं।

पुस्तक विमोचन के बाद आयोजित काव्य पाठ में साहित्यकारों के साथ-साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सरोकार, प्रकृति और मानवीय मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। काव्य पाठ करने वालों में विश्वनाथ मिश्र, रामेश्वर चौधरी, डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’, डॉ. बी.एल. प्रवीण, कुशध्वज सिंह उर्फ मुन्ना, फारूक सैफी, संजय सागर, प्रदीप शरण और मुक्तेश्वर प्रसाद प्रमुख रहे।अपने अध्यक्षीय संबोधन में अरुण मोहन भारवि ने कहा कि डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ बाल साहित्य के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापन कार्य के साथ साहित्य सृजन को निरंतर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन डॉ. मीरा ने इसे अपनी प्रतिबद्धता और मेहनत से संभव किया है।

कार्यक्रम में जिला स्कूल के प्रधानाचार्य रवि प्रभात, पूर्व प्रधानाचार्या पुष्पा कुमारी, अश्विनी कुमार सिंह, अंशुमान सिंह, रौशन कुमार सिंह, मीरा गुप्ता, प्रो. रामविनय सिंह, अजय कुमार उपाध्याय, राजू ठाकुर, अभिनव प्रसून, जिज्ञासा कुमारी, आर्या सिंह और रौशन चौधरी समेत बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में जिला श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष डॉ. शशांक शेखर उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समाज में सृजनशीलता और साहित्यिक चेतना को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।