साइबर ठगी पर उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी, एसबीआई को ग्राहक की पूरी रकम लौटाने का आदेश

साइबर ठगी के मामलों में बैंक की जवाबदेही तय करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बक्सर ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंक की सेवा में त्रुटि मानते हुए ग्राहक के खाते से साइबर हैकिंग के जरिए निकाली गई पूरी राशि लौटाने के साथ ब्याज और क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया है।

साइबर ठगी पर उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी, एसबीआई को ग्राहक की पूरी रकम लौटाने का आदेश

__ आरबीआई के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को माना सेवा में त्रुटि, 60 दिनों में 3.96 लाख रुपये, ब्याज और 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का निर्देश

 केटी न्यूज/बक्सर।

साइबर ठगी के मामलों में बैंक की जवाबदेही तय करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बक्सर ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंक की सेवा में त्रुटि मानते हुए ग्राहक के खाते से साइबर हैकिंग के जरिए निकाली गई पूरी राशि लौटाने के साथ ब्याज और क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग का यह फैसला बैंकिंग गोपनीयता और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर अहम माना जा रहा है।मामला परिवाद पत्र संख्या 6/2024 से जुड़ा है। परिवादी एलआईसी के सेवानिवृत्त अधिकारी दिनेश्वर ओझा का एसबीआई की बक्सर मुख्य शाखा में खाता है। 19 अगस्त 2021 को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को नेशनल कंज्यूमर बोर्ड का प्रतिनिधि बताया।

बातचीत के महज तीन मिनट के भीतर उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 3 लाख 96 हजार 500 रुपये निकाल लिए गए।परिवादी का कहना था कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ न तो ओटीपी साझा किया और न ही इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित यूजर आईडी अथवा पासवर्ड की जानकारी दी। इसके बावजूद खाते से अवैध निकासी हो गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बैंक आरबीआई की निर्धारित सुरक्षा गाइडलाइन का प्रभावी ढंग से पालन करने में विफल रहा, जिससे साइबर अपराधियों को वारदात अंजाम देने का अवसर मिला।आयोग ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय के उस सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार यदि ग्राहक की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई है तो अनधिकृत निकासी की जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह एवं सदस्य राजीव सिंह की खंडपीठ ने एसबीआई बक्सर शाखा और मुख्य प्रबंधक, पटना को निर्देश दिया है कि 60 दिनों के भीतर परिवादी को निकाली गई 3 लाख 96 हजार 500 रुपये की राशि, परिवाद दायर करने की तिथि से पांच प्रतिशत वार्षिक ब्याज तथा 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान करें। आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर पूरी देय राशि पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वसूली की जाएगी।