राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में उमड़ी आस्था, रहस्यमयी मान्यताओं के बीच हुआ वार्षिक पूजनोत्सव

डुमरांव नगर के लाला टोली रोड स्थित प्रसिद्ध राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मां भगवती मंदिर में वार्षिक पूजनोत्सव बुधवार को धार्मिक उल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित विशेष पूजा को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक तांत्रिक विधि से मां भगवती की पूजा-अर्चना की गई। मुख्य पुजारी किरण मिश्र के नेतृत्व में हुए अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर जय माता दी के जयकारों से गूंजता रहा।

राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में उमड़ी आस्था, रहस्यमयी मान्यताओं के बीच हुआ वार्षिक पूजनोत्सव

__ माघ पूर्णिमा पर विशेष पूजा में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, मंदिर की ध्वनि और मूर्तियों से जुड़ी चर्चाएं बनीं आकर्षण का केंद्र

केटी न्यूज/डुमरांव। 

डुमरांव नगर के लाला टोली रोड स्थित प्रसिद्ध राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मां भगवती मंदिर में वार्षिक पूजनोत्सव बुधवार को धार्मिक उल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित विशेष पूजा को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक तांत्रिक विधि से मां भगवती की पूजा-अर्चना की गई। मुख्य पुजारी किरण मिश्र के नेतृत्व में हुए अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर जय माता दी के जयकारों से गूंजता रहा।

पूरे दिन श्रद्धालुओं के पहुंचने और दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा। भक्तों ने मां भगवती के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। देर शाम तक मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।

__ चार सौ साल पुरानी परंपरा से जुड़ा है मंदिर

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास करीब चार सौ वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि प्रसिद्ध तांत्रिक पंडित भवानी मिश्र ने इसकी स्थापना की थी। स्थापना के बाद से ही उनके परिवार के सदस्य मंदिर की पूजा-पद्धति और पुजारी की जिम्मेदारी संभालते आ रहे हैं। वर्तमान पुजारी किरण मिश्र के अनुसार मंदिर की पूजा परंपरा तांत्रिक विधि पर आधारित है। यहां सामान्य मंदिरों की तरह कलश स्थापना की परंपरा नहीं है, बल्कि विशेष तांत्रिक विधि से मां भगवती की प्राण-प्रतिष्ठा किए जाने की मान्यता है।

मंदिर में सप्तशती पाठ का विशेष महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहां पूजा-अर्चना करते हैं और सूखे मेवे का प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है।

आधी रात की आवाजों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं

धार्मिक आस्था के साथ यह मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के कारण भी लोगों के बीच चर्चा में रहता है। स्थानीय लोगों के बीच ऐसी मान्यता प्रचलित है कि रात के समय मंदिर में स्थापित मूर्तियों से बातचीत जैसी धीमी आवाजें सुनाई देती हैं। खासकर आधी रात के आसपास फुसफुसाहट जैसी ध्वनि सुनने का दावा कई लोग करते रहे हैं।

इसी मान्यता के कारण मंदिर तंत्र साधना के लिए भी चर्चित है और दूर-दराज से साधक यहां पहुंचते हैं। हालांकि मूर्तियों के बातचीत करने की बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं है। मंदिर की बनावट और ध्वनि के परावर्तन को लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं जरूर की जाती रही हैं। माना जाता है कि विशेष संरचना के कारण आसपास की सूक्ष्म आवाजें भी लंबे समय तक प्रतिध्वनित हो सकती हैं, जिससे रहस्यमयी ध्वनि का अनुभव होता है।

आस्था, परंपरा और रहस्य से जुड़ी इन चर्चाओं ने राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर को डुमरांव ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी एक विशिष्ट धार्मिक स्थल के रूप में पहचान दिलाई है।