ग्रामीण पगडंडी से शोध की ऊँचाइयों तक: दुल्लहपुर की शालू सिंह ने जेआरएफ क्वालीफाई कर रचा इतिहास

कहते हैं, सपनों की उड़ान के लिए बड़े शहर नहीं, बड़ा हौसला चाहिए और इस कहावत को सच कर दिखाया है दुल्लहपुर गांव की बेटी शालू सिंह ने। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी शालू ने यूजीसी नेट जेआरएफ 2026 की कठिन परीक्षा में 99.5 पर्सेंटाइल हासिल कर न सिर्फ अपने गांव, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

ग्रामीण पगडंडी से शोध की ऊँचाइयों तक: दुल्लहपुर की शालू सिंह ने जेआरएफ क्वालीफाई कर रचा इतिहास

केटी न्यूज/डुमरांव

कहते हैं, सपनों की उड़ान के लिए बड़े शहर नहीं, बड़ा हौसला चाहिए और इस कहावत को सच कर दिखाया है दुल्लहपुर गांव की बेटी शालू सिंह ने। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी शालू ने यूजीसी नेट जेआरएफ 2026 की कठिन परीक्षा में 99.5 पर्सेंटाइल हासिल कर न सिर्फ अपने गांव, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।शालू सिंह, दुल्लहपुर निवासी ओमप्रकाश सिंह और सविता देवी की पुत्री हैं। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि जेआरएफ केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि शोध और शिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्टता की मुहर है।जेआरएफ के माध्यम से पीएचडी शोधार्थियों को मासिक छात्रवृत्ति मिलती है और यह सहायक प्रोफेसर बनने की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा भी है।

शालू की शैक्षणिक यात्रा प्रेरणादायी है। प्रारंभिक शिक्षा बाल विकास केंद्र, हीतन पड़री से लेकर राज +2 उच्च विद्यालय, डुमरांव से इंटरमीडिएट (कॉमर्स), फिर पटना वीमेंस कॉलेज से बीकॉम, धीरेन्द्र महिला महाविद्यालय, वाराणसी से एमकॉम और वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पीएचडी—हर पड़ाव पर मेहनत और अनुशासन की मिसाल दिखाई। वे इन दिनों “ट्रेसिंग एथिक्स ऑफ इंडियन प्रैक्टिसेज फ्रॉम एंशियंट टेक्स्ट्स टू मॉडर्न कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी” विषय पर शोध कर रही हैं।गौरतलब है कि शालू इंटरमीडिएट परीक्षा में भी जिला टॉपर रह चुकी हैं। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने दादा-दादी, माता-पिता और गुरुजनों को दिया। उनका कहना है कि यह सफलता उन तमाम ग्रामीण छात्रों की है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

इस उपलब्धि पर गांव में खुशी की लहर है। शालू के गुरुओं और शुभचिंतकों सतीश चंद्र त्रिपाठी, प्रधानाध्यापक अनुराग मिश्रा, विमल कुमार सिंह, डॉ. अभय कुमार पाण्डेय, अंकेश कुमार, अजय कुमार चौबे, डाइट डुमरांव के प्राचार्य विवेक कुमार मौर्य, सहायक प्राचार्य नवनीत कुमार सिंह, बीईओ सुधांशु कुमार, प्रधानाध्यापक शैलेंद्र पाण्डेय, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भुवन, साहित्यकार विष्णुदेव तिवारी सहित अनेक बुद्धिजीवियों ने बधाई दी है।शालू सिंह की यह सफलता बताती है कि गांव की गलियों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर की पहचान बनाई जा सकती है, बस लगन और विश्वास चाहिए।