माटी की खुशबू से सिलिकॉन वैली तक: किसान पुत्र हिमांशु ने रचा सफलता का नया इतिहास
कहते हैं कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, और इस कहावत को सच कर दिखाया है बक्सर के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले हिमांशु पटेल ने। इटाढ़ी रोड स्थित ओल्ड राइस मिल मोहल्ला निवासी राम पटेल के पुत्र हिमांशु ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
-- बक्सर के युवा अभियंता को अंतरराष्ट्रीय कंपनी में बड़ी जिम्मेदारी, अमेरिका में करेंगे विशेष परियोजना का नेतृत्व, ढाई करोड़ सलाना का मिला पैकेज
केटी न्यूज/बक्सर
कहते हैं कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, और इस कहावत को सच कर दिखाया है बक्सर के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले हिमांशु पटेल ने। इटाढ़ी रोड स्थित ओल्ड राइस मिल मोहल्ला निवासी राम पटेल के पुत्र हिमांशु ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।सिमरी प्रखंड के बड़का सिंघनपुरा गांव के मूल निवासी हिमांशु ने प्रारंभ से ही पढ़ाई में असाधारण प्रतिभा दिखाई। 11वीं और 12वीं की शिक्षा उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल, बक्सर से पूरी की।इसके बाद पंजाब से अभियांत्रिकी स्नातक (बी.टेक) की पढ़ाई की, जहां वे स्वर्ण पदक प्राप्त कर अव्वल रहे।

वर्ष 2020 में उन्होंने प्रथम प्रयास में ही ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी मेधा का परिचय दिया।इसके उपरांत उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी से वर्ष 2022 में कंप्यूटर विज्ञान में परास्नातक (एम.टेक) की डिग्री प्राप्त की। उच्च तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद वे वर्तमान में बेंगलुरु स्थित अमेज़न कंपनी में सॉफ्टवेयर विकास अभियंता-2 के पद पर कार्यरत हैं। अब हिमांशु को कंपनी की एक विशेष अंतरराष्ट्रीय परियोजना के तहत अमेरिका के अर्लिंग्टन शहर भेजा जा रहा है।उन्हें एल-1बी श्रेणी का वीजा प्राप्त हुआ है, जिसे विशेषज्ञता आधारित और अत्यंत चुनौतीपूर्ण वीजा माना जाता है।

कड़े आप्रवासन नियमों के बीच यह उपलब्धि अपने आप में बड़ी सफलता है।सूत्रों के अनुसार अमेरिका में उनका वार्षिक वेतन पैकेज लगभग ढाई से तीन करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवा भी वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकते हैं।हिमांशु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, विशेष रूप से अपने बड़े पापा कमला शंकर प्रसाद तथा अपने मित्रों को दिया है।

उन्होंने कहा कि बड़े पापा उनके जीवन के प्रेरणास्रोत हैं और कठिन समय में मित्रों का सहयोग उनके आत्मविश्वास को मजबूत करता रहा।एक किसान के घर जन्मे इस युवा अभियंता की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में गर्व और उत्साह का माहौल है। गांव से लेकर शहर तक लोग हिमांशु की सफलता को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा मान रहे हैं। उनकी यह यात्रा इस बात का संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।

