घनी आबादी के बीच सरेआम कूड़ा डंप, एनजीटी की खुलेआम अवहेलना

डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पुरान भोजपुर की घनी आबादी के ठीक बीचों-बीच, नगर परिषद के स्वागत द्वार के समीप ही सफाई एजेंसी द्वारा खुलेआम कूड़ा डंप किया जा रहा है। यह न सिर्फ आमजन के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना भी है। यह आरोप डुमरांव नगर परिषद के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर अजय राय ने लगाए हैं।

घनी आबादी के बीच सरेआम कूड़ा डंप, एनजीटी की खुलेआम अवहेलना

-- 92 लाख मासिक खर्च के बावजूद कचरा निस्तारण फेल, स्वच्छता के ब्रांड एंबेसडर ने नगर परिषद पर लगाए गंभीर आरोप

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पुरान भोजपुर की घनी आबादी के ठीक बीचों-बीच, नगर परिषद के स्वागत द्वार के समीप ही सफाई एजेंसी द्वारा खुलेआम कूड़ा डंप किया जा रहा है। यह न सिर्फ आमजन के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना भी है। यह आरोप डुमरांव नगर परिषद के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर अजय राय ने लगाए हैं।अजय राय का कहना है कि नगर परिषद हर महीने सफाई व्यवस्था के नाम पर करीब 92 लाख रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव के बाद उसके समुचित निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है।

नतीजतन शहर से निकलने वाला कचरा सीमावर्ती और आबादी वाले इलाकों में खुलेआम फेंका जा रहा है, जिससे प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य है, लेकिन डुमरांव नगर परिषद स्वयं इन नियमों को ताक पर रखकर तालाबों, नदियों, स्कूलों, मंदिरों और प्रमुख सड़कों के किनारे कचरा फेंकने को बढ़ावा दे रही है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को दुर्गंध, मच्छर और संक्रामक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।अजय राय ने यह भी कहा कि पुरान भोजपुर क्षेत्र शहर का प्रवेश द्वार माना जाता है।

नगर परिषद का स्वागत द्वार वहीं स्थित है, लेकिन उसी स्थान पर कूड़े का ढेर शहर की छवि को धूमिल कर रहा है। बाहर से आने वाले लोग जब डुमरांव में प्रवेश करते हैं तो उन्हें सबसे पहले गंदगी का अंबार दिखता है, जो नगर परिषद की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में कूड़े से निकला गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे फिसलन और बदबू बढ़ जाती है। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है, वहीं मवेशी भी कचरे में मुंह मारते नजर आते हैं।

स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर ने मांग की है कि नगर परिषद तत्काल कूड़ा निस्तारण के लिए वैज्ञानिक और स्थायी समाधान अपनाए। साथ ही एनजीटी गाइडलाइन के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे इस मामले को उच्च अधिकारियों और संबंधित पर्यावरणीय मंचों तक ले जाएंगे।फिलहाल, डुमरांव नगर परिषद की स्वच्छता व्यवस्था कागजों में भले ही चमकदार दिखे, लेकिन जमीनी हकीकत कूड़े के ढेर के नीचे दबती नजर आ रही है।