कांग्रेस की समीक्षा बैठक में जिलाध्यक्ष ने उठाए निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता पर सवाल
बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब चार घंटे चली इस बैठक में सभी प्रखंड अध्यक्ष, वरिष्ठ कांग्रेसजन, प्रदेश प्रतिनिधि और एआईसीसी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में महागठबंधन प्रत्याशी की हार के कारणों पर विस्तृत चर्चा की गई।

केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब चार घंटे चली इस बैठक में सभी प्रखंड अध्यक्ष, वरिष्ठ कांग्रेसजन, प्रदेश प्रतिनिधि और एआईसीसी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में महागठबंधन प्रत्याशी की हार के कारणों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक की शुरुआत में डॉ. पांडे ने चुनाव परिणाम से जुड़े सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विमर्श किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ-वार प्रदर्शन, मतदान प्रतिशत में कमी और विपक्षी मतों में आए उतार-चढ़ाव के कारणों पर राय मांगी। चर्चा के बाद सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय नेतृत्व तथा बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा गया।
डॉ. पांडे ने कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर बूथ-स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके लिए विशेष टीमें गठित की जा रही हैं, जो गांव-गांव जाकर वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश करेंगी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई चरणों में संदेहजनक स्थितियां बनीं, जिससे चुनाव की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़ा होता है। विपक्षी मतों में अचानक आए बदलाव से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी संदेह गहराया है। इस संदर्भ में उन्होंने राहुल गांधी द्वारा पिछले छह महीनों से दिए जा रहे चेतावनी भरे वक्तव्यों को भी प्रासंगिक बताया।
बैठक में कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक कमजोरियों पर भी चिंता जताई। विशेष रूप से जिला कांग्रेस की नई कमेटी का अनुमोदन न होना हार के कारणों में शामिल माना गया। डॉ. पांडे ने कहा कि मजबूत और सक्रिय कमेटी के बिना प्रभावी चुनावी रणनीति संभव नहीं है।इसके साथ ही महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम की असमय घोषणाकृतेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री घोषित करने को भी हार का प्रमुख कारण बताया गया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह निर्णय कई क्षेत्रों में जनता को स्वीकार नहीं हुआ, जिसका असर सीधे मतदान पर पड़ा।

