कलियुग का शॉर्टकट मोक्ष: हरि नाम स्मरण से जीवन की दिशा बदलने का संदेश
कलियुग में मोक्ष कोई कठिन तपस्या या जंगलों में वर्षों की साधना का परिणाम नहीं, बल्कि जीवन के बीचोबीच ईश्वर से जुड़ने की सरल प्रक्रिया है। हरि नाम का स्मरण, बस यही वह सूत्र है, जो मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त कर सकता है। यह संदेश प्रसिद्ध संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रखंड के दसियांव गांव में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान दिया।
-- केसठ के दसियांव गांव में श्रीराम कथा के मंच से जीयर स्वामी जी महाराज का आध्यात्मिक आह्वान
केटी न्यूज/केसठ।
कलियुग में मोक्ष कोई कठिन तपस्या या जंगलों में वर्षों की साधना का परिणाम नहीं, बल्कि जीवन के बीचोबीच ईश्वर से जुड़ने की सरल प्रक्रिया है। हरि नाम का स्मरण, बस यही वह सूत्र है, जो मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त कर सकता है। यह संदेश प्रसिद्ध संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रखंड के दसियांव गांव में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान दिया।शनिवार को बाबा हरसु मानस मंडल के तत्वावधान में आयोजित कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा मंच से स्वामी जी महाराज ने कलियुग के मनुष्य की जीवनशैली, उसकी दौड़ और भटकाव पर गहरी दृष्टि डालते हुए मोक्ष का एक “व्यावहारिक मार्ग” सामने रखा।

-- गृहस्थ जीवन में रहकर भी संभव है मुक्ति
जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि कलियुग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मोक्ष के लिए कठोर तप, व्रत या संन्यास अनिवार्य नहीं है। मनुष्य गृहस्थ आश्रम में रहते हुए, अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निभाते हुए भी ईश्वर के नाम स्मरण से मुक्ति पा सकता है। उन्होंने कहा कि सतयुग, त्रेता और द्वापर में जहां ऋषि-मुनि हजारों वर्षों की तपस्या करते थे, वहीं कलियुग में भगवान ने मनुष्य के लिए मार्ग को सरल और सुलभ बना दिया है।

-- भौतिक दौड़ में उलझा आज का मानव
स्वामी जी महाराज ने आज के समाज की मानसिकता पर चिंता जताते हुए कहा कि झूठी शानो-शौकत, दिखावे और भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में मनुष्य अपना सबसे कीमती धन, समय नष्ट कर रहा है। यही कारण है कि वह जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है और कष्टों में घिर जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईश्वर का नाम किसी विशेष समय या स्थान का मोहताज नहीं है; उसे कहीं भी, किसी भी अवस्था में स्मरण किया जा सकता है।

-- कर्म, पुनर्जन्म और गुरु का महत्व
कथा के दौरान जीयर स्वामी जी महाराज ने कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का अगला जन्म उसके कर्मों से ही तय होता है। जो व्यक्ति कुमार्ग से बचाकर सद्मार्ग पर ले जाए, वही सच्चा गुरु होता है, इसलिए सदाचारी और संस्कारवान गुरु का चयन जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
-- उत्सव का माहौल, 27 जनवरी को समापन
उल्लेखनीय है कि दसियांव गांव में हरसु मानस मंडल का जन्मोत्सव कार्यक्रम पूरे उत्साह के साथ चल रहा है। जीयर स्वामी जी महाराज के आगमन पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। कथा का संचालन सतीश कुमार द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम का समापन 27 जनवरी को होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

