कंबोडिया में बक्सर के चार युवक बंधक, साइबर ठगी करने से इंकार किया तो पासपोर्ट जब्त, 6 लाख की फिरौती मांग
रोजगार के सुनहरे सपने दिखाकर विदेश भेजे गए बक्सर और भोजपुर के चार युवक कंबोडिया में कथित रूप से बंधक बना लिए गए हैं। साइबर ठगी से जुड़े काम करने से इंकार करने पर उनके पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिए गए हैं। पिछले करीब 25 दिनों से परिवार का उनसे कोई सीधा संपर्क नहीं हो पाया है। बीच-बीच में केवल वॉइस मैसेज के माध्यम से छह लाख रुपये की मांग की जा रही है। इस घटना के सामने आने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है और सभी ने सरकार से युवकों की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है।
__ रोजगार के नाम पर विदेश भेजे गए थे युवक, 25 दिनों से संपर्क टूटा; पाकिस्तानी नंबर से आया कॉल, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
केटी न्यूज/डुमरांव
रोजगार के सुनहरे सपने दिखाकर विदेश भेजे गए बक्सर और भोजपुर के चार युवक कंबोडिया में कथित रूप से बंधक बना लिए गए हैं। साइबर ठगी से जुड़े काम करने से इंकार करने पर उनके पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिए गए हैं। पिछले करीब 25 दिनों से परिवार का उनसे कोई सीधा संपर्क नहीं हो पाया है। बीच-बीच में केवल वॉइस मैसेज के माध्यम से छह लाख रुपये की मांग की जा रही है। इस घटना के सामने आने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है और सभी ने सरकार से युवकों की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है।मिली जानकारी के अनुसार कोरानसराय थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी सुखदेव सिंह के पुत्र गोविंद सिंह 3 जनवरी 2026 को नौकरी के झांसे में कंबोडिया गए थे।

उनके साथ कड़सर गांव निवासी कृष्णानंद चौधरी के पुत्र विनोद कुमार चौधरी भी गए थे। इसके अलावा भोजपुर जिले के तीयर थाना क्षेत्र के मनुडिहरी गांव निवासी हृदयानंद राम के पुत्र मरजीत कुमार तथा अगियांव क्षेत्र के खननी कलां निवासी रविंद्र राम के पुत्र मनीष कुमार 29 जनवरी को कंबोडिया पहुंचे थे। मनीष और मरजीत आपस में जीजा-साला बताए जा रहे हैं।परिजनों का आरोप है कि महाराष्ट्र का रहने वाला संतोष चौपगार उर्फ लक्की नामक दलाल युवकों को विदेश भेजने के पूरे नेटवर्क का हिस्सा है। उसने पहले मनीष को अपने झांसे में लिया और फिर सभी युवकों को कंबोडिया में होटल में फूड पैकिंग की नौकरी दिलाने का लालच दिया। इसके बदले भारतीय मुद्रा के अनुसार 75 से 80 हजार रुपये मासिक वेतन का भरोसा दिलाया गया था।

लेकिन कंबोडिया पहुंचने के बाद युवकों के सामने सच्चाई खुली। आरोप है कि वहां उनसे साइबर ठगी से जुड़े काम करवाने का दबाव बनाया गया। जब युवकों ने इस अवैध काम को करने से साफ इंकार कर दिया तो उनके पासपोर्ट और जरूरी कागजात जब्त कर लिए गए और उन्हें एक स्थान पर बंद कर दिया गया।गोविंद के भाई अखिलेश कुमार ने बताया कि 19 फरवरी को एक पाकिस्तानी नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने बताया कि गोविंद और उसके साथी वहां के ‘सिम रैप जेल’ में बंद हैं। पहले दो लाख रुपये देने की मांग की गई थी, लेकिन अब रकम बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दी गई है।

इस घटना के बाद गोविंद की मां विमला देवी और पत्नी निभा कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोगों का कहना है कि आर्थिक रूप से वे इतनी बड़ी रकम देने की स्थिति में नहीं हैं। परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है।स्थानीय स्तर पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है और लोगों का कहना है कि रोजगार के नाम पर विदेश भेजने वाले दलालों के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

