छह बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, मथुरा में नाले से मिला डुमरांव के कंटेनर चालक का शव, हत्या या दुर्घटना सस्पेंस बरकरार

रोटी की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर सड़कों पर जिंदगी गुजारने वाले डुमरांव के एक कंटेनर चालक की संदिग्ध मौत ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। नगर परिषद क्षेत्र के नावाडेरा गांव निवासी वसिष्ठ यादव का शव उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन के किनारे एक नाले से बरामद होने के बाद गांव में शोक और सवालों का माहौल है।

छह बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, मथुरा में नाले से मिला डुमरांव के कंटेनर चालक का शव, हत्या या दुर्घटना सस्पेंस बरकरार

__ दिल्ली जा रहे ट्रेलर चालक की संदिग्ध स्थिति में मौत से गांव में मातम, हादसा या साजिश? पुलिस हर पहलू से कर रही जांच

केटी न्यूज/डुमरांव

रोटी की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर सड़कों पर जिंदगी गुजारने वाले डुमरांव के एक कंटेनर चालक की संदिग्ध मौत ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। नगर परिषद क्षेत्र के नावाडेरा गांव निवासी वसिष्ठ यादव का शव उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन के किनारे एक नाले से बरामद होने के बाद गांव में शोक और सवालों का माहौल है। छह बच्चों और पत्नी के भरण-पोषण का जिम्मा अकेले संभालने वाले वसिष्ठ की मौत ने परिवार के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।जानकारी के अनुसार वसिष्ठ यादव महाराष्ट्र की एक बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी में ट्रेलर चालक के रूप में कार्यरत थे। गुरुवार को वह माल लोड कर दिल्ली की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनका कंटेनर मथुरा जिले के कोसीकलां थाना क्षेत्र अंतर्गत आर्यन नगर के समीप खड़ा मिला।

कुछ दूरी पर एक नाले से उनका शव बरामद किया गया। चालक का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वसिष्ठ करीब तीन घंटे तक उसी इलाके में रुके हुए थे। इस दौरान उन्होंने आसपास के मिस्त्रियों से अपने वाहन में कमानी का काम भी कराया था। पूछताछ में मिस्त्रियों ने बताया कि वाहन की मरम्मत कराने के बाद चालक रात करीब सवा तीन बजे वहां से रवाना होने की तैयारी कर रहा था।कोसीकलां थाना पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया आशंका है कि कंटेनर पर चढ़ने के दौरान चालक का पैर फिसल गया होगा और वह पास के खुले नाले या गड्ढे में गिर गया होगा। हालांकि पुलिस इस मामले को केवल हादसा मानकर नहीं चल रही है।

अधिकारियों का कहना है कि किसी विवाद या अन्य परिस्थिति की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण सभी बिंदुओं पर जांच जारी है।घटनास्थल की परिस्थितियां भी कई सवाल खड़े कर रही हैं। कंटेनर का ड्राइवर साइड का गेट खुला मिला, लेकिन वाहन में लदे माल के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हुई थी। कंपनी द्वारा लगाए गए हाई-सिक्योरिटी कंप्यूटर लॉक सिस्टम भी पूरी तरह सुरक्षित पाए गए। पुलिस का कहना है कि अब तक ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं जो लूटपाट या सुनियोजित हत्या की पुष्टि करते हों। फिर भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।उधर, जैसे ही घटना की सूचना नावाडेरा गांव पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया।

मृतक की पत्नी मुनिया देवी और छह बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की कहानी पहले से ही संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों से भरी रही है।वसिष्ठ तीन भाइयों में एक थे। उनके बड़े भाई लक्ष्मण यादव कई वर्ष पहले मानसिक स्थिति बिगड़ने के बाद घर से लापता हो गए थे और आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। भाई के लापता होने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी वसिष्ठ के कंधों पर आ गई थी।परिवार को संभालने के लिए वसिष्ठ ने बाद में अपने लापता भाई की पत्नी मुनिया देवी से विवाह किया और दोनों परिवारों के बच्चों का पालन-पोषण अपने दम पर किया। छह बच्चों वाले इस परिवार में सबसे बड़े बच्चे की उम्र करीब 20 वर्ष जबकि सबसे छोटा बच्चा मात्र छह वर्ष का है।

सभी की पढ़ाई, परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतों का भार वसिष्ठ अकेले उठाते थे।अब उनकी अचानक मौत के बाद परिवार पूरी तरह संकट में घिर गया है। परिजनों के अनुसार ट्रांसपोर्ट लाइन में काम करने के कारण वसिष्ठ साल में मुश्किल से एक बार घर आ पाते थे, लेकिन परिवार की हर जरूरत का ध्यान रखते थे। घटना की सूचना मिलने के बाद परिजन मथुरा के लिए रवाना हो गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।फिलहाल गांव में हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है—क्या यह महज एक दर्दनाक हादसा था या फिर वसिष्ठ यादव की मौत के पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है? इसका जवाब अब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही सामने आएगा।