रामनाम के जयघोष से गूंजा तुलसी आश्रम, प्रभु श्रीराम के जन्म पर भावविभोर हुए श्रद्धालु

सावन के पावन माह में तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन बुधवार को प्रभु श्रीराम के जन्म का दिव्य और भक्तिमय प्रसंग मंचित किया गया। भगवान श्रीराम के अवतरण का दृश्य सामने आते ही पूरा परिसर श्रद्धा और उल्लास से भर उठा।

रामनाम के जयघोष से गूंजा तुलसी आश्रम, प्रभु श्रीराम के जन्म पर भावविभोर हुए श्रद्धालु

__ चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन से लेकर बाल रूप में अवतरण तक सजी रामजन्म की मनोहारी लीला, अयोध्या में छाया उत्सव का दृश्य

केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।

सावन के पावन माह में तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन बुधवार को प्रभु श्रीराम के जन्म का दिव्य और भक्तिमय प्रसंग मंचित किया गया। भगवान श्रीराम के अवतरण का दृश्य सामने आते ही पूरा परिसर श्रद्धा और उल्लास से भर उठा। श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि के साथ ‘जय श्रीराम’ के जयघोष किए, जिससे पूरा वातावरण राममय हो गया।रामलीला में दिखाया गया कि अयोध्या नरेश राजा दशरथ वृद्धावस्था में पहुंचने के बाद भी संतान सुख से वंचित हैं। उत्तराधिकारी के अभाव में उन्हें अयोध्या के भविष्य और राजकाज की चिंता सताने लगती है। इस समस्या के समाधान के लिए वे गुरु महर्षि वशिष्ठ की शरण में पहुंचते हैं।

गुरु के मार्गदर्शन में विधि-विधान से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया जाता है। यज्ञ के फलस्वरूप प्रभु श्रीराम समेत चारों भाइयों के जन्म का मार्ग प्रशस्त होता है।रामजन्म से पूर्व भगवान श्रीराम के चतुर्भुज स्वरूप में प्रकट होने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। माता कौशल्या प्रभु के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भावविभोर हो जाती हैं। लोक-मर्यादा और मातृत्व की भावना व्यक्त करते हुए वे प्रभु से बाल रूप धारण करने का आग्रह करती हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम बाल रूप में अवतरित होते हैं। प्रभु के जन्म के साथ ही अयोध्या में उत्सव का दृश्य जीवंत हो उठता है।अयोध्यावासी सोहर गाते हुए नाचते-झूमते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं। घर-आंगन दीपों से जगमगा उठते हैं।

रामजन्म की खुशी में मंचित इस दृश्य ने दर्शकों को भक्ति और आनंद से सराबोर कर दिया। कलाकारों के प्रभावी संवाद, सजीव अभिनय और आकर्षक मंच सज्जा की श्रद्धालुओं ने सराहना की।तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा ने बताया कि आगामी प्रसंगों में प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं के साथ उनके बक्सर आगमन, शिक्षा ग्रहण करने तथा राक्षसों के वध से जुड़े प्रसंगों का मंचन होगा। उन्होंने कहा कि सावन में आयोजित रामलीला का उद्देश्य धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। आगामी मंचन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।