सिंचाई संकट से खरीफ की तैयारी प्रभावित, समय पर पानी नहीं मिलने से किसानों की बढ़ी चिंता
खरीफ मौसम की दस्तक के साथ चौसा क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को लेकर किसानों की चिंता गहराने लगी है। क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई योजनाओं में शामिल चौसा पम्प हाउस, सोन कैनाल और निकृष पम्प कैनाल अब तक चालू नहीं होने से नहरें सूखी पड़ी हैं।

केटी न्यूज/चौसा
खरीफ मौसम की दस्तक के साथ चौसा क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को लेकर किसानों की चिंता गहराने लगी है। क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई योजनाओं में शामिल चौसा पम्प हाउस, सोन कैनाल और निकृष पम्प कैनाल अब तक चालू नहीं होने से नहरें सूखी पड़ी हैं। इसका सीधा असर धान की खेती की तैयारियों पर पड़ रहा है। समय पर पानी उपलब्ध नहीं होने से किसान धान की नर्सरी तैयार करने और खेतों की प्रारंभिक तैयारी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।स्थानीय किसानों के अनुसार पूर्व के वर्षों में मई के अंतिम सप्ताह तक नहरों में पानी पहुंचना शुरू हो जाता था, जिससे धान की बुआई के लिए आवश्यक बिचड़ा तैयार करने का कार्य समय पर शुरू हो जाता था। इस बार मई समाप्त होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं पहुंचने से खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो धान रोपनी का समय भी प्रभावित हो सकता है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।क्षेत्र के कई किसानों ने बताया कि पानी के अभाव में उन्हें निजी बोरिंग और अन्य साधनों के जरिए खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास निजी सिंचाई के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, सबसे अधिक परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकारी सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर रहने वाले किसानों के सामने इस समय गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

सिंचाई संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। नहरों में पानी नहीं होने से आसपास के पशुओं और पक्षियों के लिए भी पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में नहरें जल स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन इस बार सूखी नहरों के कारण पशुधन को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।किसानों और ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग तथा प्रशासन से तत्काल पहल करते हुए चौसा पम्प हाउस और संबंधित कैनालों को चालू कराने तथा नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है, ताकि खरीफ खेती की तैयारियां समय पर पूरी हो सकें और किसानों को राहत मिल सके।

