दो साल बाद भी नहीं मिला न्याय: बनारपुर के किसानों का फूटा गुस्सा, काला दिवस पर सरकार को चेतावनी
चौसा प्रखंड के बनारपुर गांव में वर्ष 2024 की पुलिस कार्रवाई की दूसरी बरसी पर शुक्रवार को माहौल एक बार फिर गुस्से और पीड़ा से भर गया। प्रभावित किसानों ने “काला दिवस” मनाते हुए परियोजना स्थल के समीप मुरा बाबा के पास काली पट्टी बांधकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में जुटे किसानों ने न्याय की मांग को लेकर आवाज बुलंद की और प्रशासन व प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
__ पुलिस कार्रवाई की बरसी पर सैकड़ों किसान धरने पर बैठे, मुआवजा, रोजगार और फर्जी मुकदमों की वापसी की उठी मांग
केटी न्यूज/चौसा
चौसा प्रखंड के बनारपुर गांव में वर्ष 2024 की पुलिस कार्रवाई की दूसरी बरसी पर शुक्रवार को माहौल एक बार फिर गुस्से और पीड़ा से भर गया। प्रभावित किसानों ने “काला दिवस” मनाते हुए परियोजना स्थल के समीप मुरा बाबा के पास काली पट्टी बांधकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में जुटे किसानों ने न्याय की मांग को लेकर आवाज बुलंद की और प्रशासन व प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।धरना स्थल पर उस दिन की तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

किसानों ने आरोप लगाया कि दो साल पहले भारी पुलिस बल ने गांव में घुसकर महिलाओं और पुरुषों के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, घरों में तोड़फोड़ की गई और कई निर्दोष लोगों को जेल भेजा गया। इस कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें से कुछ की बाद में मौत भी हो गई।कार्यक्रम के दौरान दिवंगत किसानों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।किसानों का कहना था कि आज तक न तो दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सका।

उल्टा आंदोलन में शामिल किसानों पर दर्जनों फर्जी मुकदमे लाद दिए गए, जिनसे वे आज भी जूझ रहे हैं।मोर्चा के नेताओं अंशु चौबे, मुन्ना तिवारी और रामप्रवेश यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की है। उन्होंने बताया कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था, जिसके तहत 913 युवाओं की सूची सौंपी गई थी, लेकिन अब तक केवल 11 लोगों को ही नौकरी दी गई है। इसे उन्होंने खुली धोखाधड़ी करार दिया।किसानों ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही मुआवजा, रोजगार और प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अब वे किसी भी कीमत पर अपने अधिकारों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।दोपहर बाद एसटीपीएल के एचआर प्रमुख कुलदीप धरना स्थल पर पहुंचे, जहां किसानों ने उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा और आगामी आंदोलन की रणनीति से अवगत कराया।धरने में नंदलाल सिंह, शिवजी तिवारी, गोरखनाथ पांडेय, शैलेश राय, हरिश्चंद्र साह, रामप्रवेश सिंह, छेदी सिंह, बृजेश राय, मुन्ना तिवारी और अश्विनी चौबे समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।

