सीएमआर भुगतान में देरी से पैक्स पर संकट, धान अधिप्राप्ति लक्ष्य पर मंडराया खतरा
जिले में खरीफ विपणन वर्ष के तहत चल रही धान अधिप्राप्ति व्यवस्था अब प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। एक ओर सरकार किसानों से धान खरीद को लेकर गंभीरता दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर पैक्स समितियां भुगतान संकट से जूझ रही हैं। जिले को 12 लाख 87 हजार मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है, जिसके मुकाबले अब तक मात्र 53,954.410 मीट्रिक टन धान की खरीद 6,249 किसानों से हो सकी है।
केटी न्यूज/डुमरांव
जिले में खरीफ विपणन वर्ष के तहत चल रही धान अधिप्राप्ति व्यवस्था अब प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। एक ओर सरकार किसानों से धान खरीद को लेकर गंभीरता दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर पैक्स समितियां भुगतान संकट से जूझ रही हैं। जिले को 12 लाख 87 हजार मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है, जिसके मुकाबले अब तक मात्र 53,954.410 मीट्रिक टन धान की खरीद 6,249 किसानों से हो सकी है।धान अधिप्राप्ति के बाद पैक्स के माध्यम से चावल मिलों में कस्टम मिलिंग कराकर एसएफसी को सीएमआर सौंपा जाता है।

वर्तमान में पैक्स समितियों द्वारा 5,868 मीट्रिक टन सीएमआर एसएफसी को दिया जा चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इसके एवज में एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया है। इससे पैक्स समितियों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है।पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि नियमों के अनुसार सीएमआर गिरने के चार दिनों के भीतर एसएफसी को भुगतान करना अनिवार्य है, लेकिन व्यवहार में इसका खुला उल्लंघन हो रहा है। भुगतान नहीं मिलने के कारण पैक्स को बैंक ऋण पर अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ रहा है, जबकि किसानों को धान खरीद के 48 घंटे के भीतर भुगतान करना उनकी मजबूरी है।

पैक्स प्रतिनिधियों ने चेताया है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो धान अधिप्राप्ति की रफ्तार थम सकती है। कई समितियों की कार्यशील पूंजी पूरी तरह फंस चुकी है, जिससे आगे किसानों से धान खरीदना मुश्किल हो जाएगा। इसका सीधा असर सरकारी लक्ष्य पर पड़ेगा।पैक्स अध्यक्षों ने जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार भुगतान समस्या को लेकर उच्च स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है और समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में एसएफसी अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

