15वें वित्त की नाली निर्माण योजना पर सवाल, कठघरवा में उठी भ्रष्टाचार की बू

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता की बातें कागजों तक सिमटती दिख रही हैं। चौसा प्रखंड की पवनी पंचायत अंतर्गत कठघरवा गांव में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। गांव में चल रहा यह निर्माण कार्य न केवल तय मानकों की अनदेखी कर रहा है, बल्कि इससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका भी गहराती जा रही है।

15वें वित्त की नाली निर्माण योजना पर सवाल, कठघरवा में उठी भ्रष्टाचार की बू

-- बोले ग्रामीण पारदर्शिता गायब, गुणवत्ता से हो रहा है खिलवाड़

केटी न्यूज/चौसा

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता की बातें कागजों तक सिमटती दिख रही हैं। चौसा प्रखंड की पवनी पंचायत अंतर्गत कठघरवा गांव में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। गांव में चल रहा यह निर्माण कार्य न केवल तय मानकों की अनदेखी कर रहा है, बल्कि इससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका भी गहराती जा रही है।

-- बिना प्राक्कलन बोर्ड, बिना जवाबदेही

सबसे गंभीर पहलू यह है कि निर्माण स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। इससे ग्रामीणों को यह तक जानकारी नहीं मिल पा रही कि योजना की कुल लागत क्या है, नाली की लंबाई-चौड़ाई कितनी है और किस गुणवत्ता के सामग्री का उपयोग किया जाना है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थिति सिर्फ कठघरवा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रखंड की लगभग सभी पंचायतों में यही हाल है। बिना सूचना बोर्ड के योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह गायब हो चुकी है।

-- घटिया ईंट और कमजोर नींव से बन रहा नाला

ग्रामीणों के अनुसार गंगा पंप नहर से लगभग 250 मीटर दूरी पर बनाए जा रहे इस बड़े नाले में दो नंबर ईंटों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। नाली की समतल और मजबूती के लिए आवश्यक कंक्रीट ढलाई भी नहीं की गई है। नतीजतन, नाली की नींव कमजोर बनी हुई है, जो आने वाले बरसात में किसी भी समय ध्वस्त हो सकती है। यह न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि गांव की जलनिकासी व्यवस्था भी ठप पड़ सकती है।

-- मसाले के अनुपात में भी खेल

स्थानीय लोगों ने निर्माण में प्रयुक्त मसाले के अनुपात पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सीमेंट और बालू का मिश्रण मानकों के अनुरूप नहीं है। इससे नाली की मजबूती पर सीधा असर पड़ेगा। धर्मेंद्र शर्मा, संजय शर्मा, संजय साह, शर्मानंद ठाकुर, सोपाल जी और परमानंद साह सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य केवल खानापूर्ति के लिए कराया जा रहा है।

-- जांच और कार्रवाई की उठी मांग

ग्रामीणों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी संवेदक के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, भविष्य में सभी विकास योजनाओं में प्राक्कलन बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाने की मांग की गई है, ताकि सरकारी धन के उपयोग पर जनता की नजर बनी रहे।

-- प्रशासन का जवाब

इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज पासवान ने कहा है कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है, ताकि ऐसी अनियमितताओं पर वास्तव में लगाम लग सकता है।