बसपा बक्सर में फैसलों की राजनीति, संगठन में बढ़ी दरार, सामूहिक 40 ने किया पद व पार्टी को बाय- बाय
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बक्सर जिला इकाई में संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठे विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है। हाल के दिनों में पार्टी द्वारा वरिष्ठ पदाधिकारी और सदर विधानसभा प्रत्याशी समेत तीन नेताओं के निष्कासन के बाद संगठन के भीतर असंतोष और तेज हो गया, जिसका परिणाम अब सामूहिक इस्तीफे के रूप में सामने आया है।
केटी न्यूज/बक्सर
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बक्सर जिला इकाई में संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठे विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है। हाल के दिनों में पार्टी द्वारा वरिष्ठ पदाधिकारी और सदर विधानसभा प्रत्याशी समेत तीन नेताओं के निष्कासन के बाद संगठन के भीतर असंतोष और तेज हो गया, जिसका परिणाम अब सामूहिक इस्तीफे के रूप में सामने आया है।जानकारी के अनुसार, पार्टी नेतृत्व द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को कई कार्यकर्ताओं ने असंतुलित और एकतरफा फैसला बताया है।

उनका कहना है कि जिन नेताओं को निष्कासित किया गया, वे लंबे समय से पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय थे और बिना व्यापक चर्चा के लिया गया यह कदम संगठन को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाला साबित हुआ।इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि निष्कासन की कार्रवाई ने पार्टी में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया। इससे कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया कि संगठन में निष्ठा और मेहनत से ज्यादा महत्व व्यक्तिगत समीकरणों को दिया जा रहा है। इसी वजह से कई जिम्मेदार पदाधिकारियों ने पार्टी से दूरी बनाने का निर्णय लिया।

उनका आरोप है कि शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिहार में संगठन को कमजोर करने वाले निर्णय लिए गए, जिससे बसपा की राजनीतिक जमीन खिसकती चली गई। लगातार उपेक्षा, संवादहीनता और सम्मान के अभाव ने असंतोष को और गहरा किया।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पहले निष्कासन और अब सामूहिक इस्तीफों की कड़ी ने बक्सर में बसपा संगठन की अंदरूनी चुनौतियों को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस संकट से उबरने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, क्योंकि यह घटनाक्रम जिले की राजनीति को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

