तीसरे दिन भी नहीं थमा सफाईकर्मियों का गुस्सा, सड़कों पर उतरा नगर परिषद का आंदोलन
नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रही। सफाईकर्मियों के कार्य बहिष्कार से नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पर असर पड़ने के साथ ही आंदोलन अब सड़कों पर भी जोर पकड़ने लगा है।


__ आउटसोर्सिंग को बताया समस्याओं की जड़, बोले- मांगों पर डेढ़ माह पहले दी थी चेतावनी; सरकार गंभीर होती तो हड़ताल की नौबत नहीं आती
केटी न्यूज/डुमरांव।
नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रही। सफाईकर्मियों के कार्य बहिष्कार से नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पर असर पड़ने के साथ ही आंदोलन अब सड़कों पर भी जोर पकड़ने लगा है। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ एवं बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले चल रहे आंदोलन में सफाईकर्मियों ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध जताया।शनिवार को नगर परिषद डुमरांव के सफाईकर्मी पुराने नगर परिषद कार्यालय परिसर में जुटे। यहां से निकला विरोध मार्च नया थाना, लाला टोली रोड, जवाहिर मंदिर होते हुए शीला सिनेमा रोड पहुंचा और पुनः पुराने नगर परिषद कार्यालय परिसर में समाप्त हुआ। मार्च के दौरान भगवती मंदिर मोड़ और शीला सिनेमा रोड मोड़ पर सभा आयोजित कर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।

सभा में बिहार राज्य स्थानीय नगर निकाय कर्मचारी महासंघ के सचिव शिव शंकर तिवारी, सीपीआई के वरिष्ठ नेता सह जिला परिषद सदस्य केदार यादव, भाकपा माले नेता सर्वेश कुमार पाण्डेय और एटक नेता ओमप्रकाश यादव ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर सरकार को करीब डेढ़ माह पहले ही लिखित सूचना दी गई थी। स्थानीय स्तर पर भी 30 जून को नगर परिषद कार्यालय में मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया था। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल और कामबंदी की स्पष्ट चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद सरकार ने आंदोलन की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।आउटसोर्सिंग के खिलाफ सबसे तीखा हमला सभा के दौरान सफाईकर्मियों की समस्याओं के लिए सरकारी विभागों में बढ़ती निजी भागीदारी और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया गया।

वक्ताओं ने कहा कि सफाई कार्यों में लगे एनजीओ के माध्यम से मजदूरों का शोषण हो रहा है और उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि सफाईकर्मियों की समस्याओं का स्थायी समाधान आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने से ही संभव है।वक्ताओं ने सरकार पर मजदूर विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते मांगों पर पहल की गई होती तो सफाईकर्मियों को हड़ताल और कामबंदी का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।सभा में भगवान पासवान, कृष्णा जी, राजेश डोम, अर्जुन बास्फोर, करन बास्फोर, रितेश राम, मिथिलेश राम, राजेश राम, महाराज मुसहर, गुड्डू प्रसाद, लक्खी नारायण समेत बड़ी संख्या में सफाईकर्मी मौजूद रहे। तीसरे दिन भी सफाईकर्मियों की एकजुटता ने साफ कर दिया कि आंदोलन फिलहाल थमने वाला नहीं है।

