श्री अन्न से बदलेगी किसानों की तकदीर, सिमरी में खुला मुनाफे वाली खेती का नया रास्ता
सिमरी प्रखंड के खरहाटाड़ पंचायत में गुरुवार को किसानों के लिए नई उम्मीद और नई खेती की दिशा दिखाने वाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से नौ चैरिटेबल हेल्थ फाउंडेशन द्वारा आयोजित किसान संगोष्ठी में मिलेट्स यानी श्री अन्न आधारित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बताया गया।


__ मिलेट्स आधारित एफपीओ से किसानों को मिलेगा बाजार, ब्रांडिंग और बेहतर दाम, विशेषज्ञ बोले— अब किसान सिर्फ उत्पादक नहीं, उद्यमी भी बनें
केटी न्यूज/सिमरी
सिमरी प्रखंड के खरहाटाड़ पंचायत में गुरुवार को किसानों के लिए नई उम्मीद और नई खेती की दिशा दिखाने वाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से नौ चैरिटेबल हेल्थ फाउंडेशन द्वारा आयोजित किसान संगोष्ठी में मिलेट्स यानी श्री अन्न आधारित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बताया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साफ कहा कि आने वाला दौर मोटे अनाज का है और जो किसान समय रहते इससे जुड़ेंगे, उन्हें बाजार और मुनाफा दोनों मिलेगा।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रिंसिपल प्रो. पारस नाथ और वैज्ञानिक डॉ. मनीभूषण ने किसानों को रासायनिक खेती से दूरी बनाकर केमिकल फ्री खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है, जबकि प्राकृतिक तरीके से उगाए गए अनाज की बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने किसानों को उन्नत बीज, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया।नाबार्ड के डीडीएम एसएम जाफर एवं आनंद वंदना ने कहा कि मिलेट्स आधारित एफपीओ बनने से छोटे और सीमांत किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।

किसान समूह बनाकर उत्पादन से लेकर बिक्री तक सामूहिक रूप से काम करेंगे, जिससे उन्हें उचित मूल्य और स्थायी बाजार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि एफपीओ किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. देवकरण ने किसानों से खेती को व्यवसाय की तरह अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल फसल उगाने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से भी जुड़ें। उन्होंने मक्का से एथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे किसानों की आमदनी में बड़ा इजाफा हो सकता है।

नौ चैरिटेबल सोशल हेल्थ फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश कुमार यादव ने बताया कि चक्की और सिमरी क्षेत्र के किसानों को बाजरा, ज्वार, मड़वा, सांवा और कंगनी जैसे मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।साथ ही ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की योजना है।कार्यक्रम में किसानों को यह भी बताया गया कि श्री अन्न कम पानी में तैयार होने वाली ऐसी फसल है, जो सूखे और खराब मौसम में भी बेहतर उत्पादन देती है। पोषण से भरपूर होने के कारण देश-विदेश में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे भविष्य में किसानों की आय में बड़ा बदलाव संभव है।

