कम खर्च में दोगुनी मेहनत का फल: नई तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

जिले के सरेजा पंचायत में रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए आयोजित किसान पाठशाला में आधुनिक खेती की नई दिशा पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना रहा, जिनसे किसानों की लागत घटे और उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने परंपरागत जुताई पद्धति के बजाय सीधे बुवाई की विधि को अपनाने की सलाह दी।

कम खर्च में दोगुनी मेहनत का फल: नई तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

केटी न्यूज/बक्सर

जिले के सरेजा पंचायत में रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए आयोजित किसान पाठशाला में आधुनिक खेती की नई दिशा पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना रहा, जिनसे किसानों की लागत घटे और उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने परंपरागत जुताई पद्धति के बजाय सीधे बुवाई की विधि को अपनाने की सलाह दी।कृषि समन्वयक शशिभूषण सिंह ने बताया कि बिना जुताई के बीज बोने की पद्धति से डीजल, श्रम और समय तीनों की बचत होती है।

उन्होंने कहा कि गेहूं सहित अन्य रबी फसलों में यह तकनीक कारगर साबित हो रही है।इससे मिट्टी की नमी संरक्षित रहती है और भूमि की उर्वरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।बीटीएम अमृता सिंह ने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग, उन्नत बीज चयन और कीट प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सही समय पर फसल प्रबंधन से उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार संभव है। वहीं एटीएम जितेंद्र कुमार मौर्य ने आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग पर बल देते हुए किसानों को सरकारी अनुदान योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

किसान सलाहकार कुमारी रीना ने समय पर बुवाई और सिंचाई प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के अनुरूप खेती के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और नई तकनीकों को अपनाने में उत्साह दिखाया। किसानों ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग भी की, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।