चौसा के शहीद सुनील सिंह को मिला सेना मेडल, आपरेशन सिंदूर में दिखाई थी वीरता

सीमा पर दुश्मन की नापाक साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े रहने वाले बक्सर जिले के लाल हवलदार सुनील कुमार सिंह ने अपने अदम्य साहस से भारतीय सेना की परंपरा को एक बार फिर गौरवान्वित किया। आपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन हमले में साथियों की सुरक्षा को सर्वाेपरि रखते हुए उन्होंने जो वीरता दिखाई, उसके लिए भारतीय सेना ने उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल (वीरता)’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित 78वें सेना दिवस समारोह में प्रदान किया गया।

चौसा के शहीद सुनील सिंह को मिला सेना मेडल, आपरेशन सिंदूर में दिखाई थी वीरता

-- पत्नी ने ग्रहण किया सम्मान, जयपुर के सेना दिवस समारोह में देश ने किया नमन

-- अंतिम सांस तक निभाया फर्ज, ड्रोन हमले के सामने अडिग रहे बक्सर के हवलदार, साथियों की जान बचाते हुए पाए थे वीरगति

केटी न्यूज/बक्सर

सीमा पर दुश्मन की नापाक साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े रहने वाले बक्सर जिले के लाल हवलदार सुनील कुमार सिंह ने अपने अदम्य साहस से भारतीय सेना की परंपरा को एक बार फिर गौरवान्वित किया। आपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन हमले में साथियों की सुरक्षा को सर्वाेपरि रखते हुए उन्होंने जो वीरता दिखाई, उसके लिए भारतीय सेना ने उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल (वीरता)’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित 78वें सेना दिवस समारोह में प्रदान किया गया।

-- ड्रोन खतरे को अकेले किया निष्क्रिय करने का प्रयास

सेना से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हवलदार सुनील कुमार सिंह 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी में तैनात थे। 9 मई 2025 की रात पाकिस्तान की ओर से वर्कशॉप क्षेत्र को निशाना बनाते हुए भारी गोलाबारी की गई। इसी दौरान उन्होंने अपनी सेंट्री पोस्ट की दिशा में छह संदिग्ध ड्रोन को आगे बढ़ते देखा। हालात की गंभीरता को भांपते हुए और बिना किसी सुरक्षा कवच के वे खुले क्षेत्र में आए तथा राइफल से ड्रोन पर फायरिंग शुरू कर दी।

-- घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ा मोर्चा

ड्रोन को रोकने की इसी कोशिश के दौरान शत्रु की ओर से दागा गया एक गोला उनकी पोस्ट के पास फटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने संयम और साहस का परिचय देते हुए अंतिम क्षणों तक ड्रोन की गतिविधियों की सटीक जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाई। उनकी सतर्कता के कारण सेना ने समय रहते ड्रोन को निष्क्रिय किया और एक बड़े नुकसान को टाल दिया। इस अद्वितीय साहस ने कई जवानों की जान बचाई।

-- सम्मान ग्रहण करते समय भावुक हुआ सभागार

सेना दिवस समारोह में जब सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आतंकवाद विरोधी अभियानों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में असाधारण योगदान देने वाले वीरों को नमन किया, तो शहीद सुनील सिंह का नाम पुकारे जाने पर पूरा सभागार भावुक हो उठा। मंच पर पहुंचकर पत्नी सुजाता देवी ने जब सम्मान ग्रहण किया, तो वह क्षण हर आंख को नम कर गया। यह दृश्य उस त्याग की गवाही था, जिसे एक सैनिक और उसका परिवार देश के लिए देता है।

-- देशसेवा की विरासत

शहीद सुनील सिंह के परिवार में देशसेवा की मजबूत परंपरा रही है। उनके छोटे भाई चंदन कुमार भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। बक्सर की धरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि यहां के सपूत देश की रक्षा के लिए सर्वाेच्च बलिदान देने से कभी पीछे नहीं हटते।

-- प्रेरणा बनकर रहेगा बलिदान

हवलदार सुनील कुमार सिंह की वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान यह संदेश देता है कि देश की सुरक्षा के लिए भारतीय सैनिक हर परिस्थिति में अडिग रहते हैं, चाहे कीमत कितनी ही बड़ी क्यों न हो।