भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सेवा और आदर्शों का प्रतीक : मधुसूदन जी महाराज
प्रखंड के रामपुर गांव में आयोजित श्रीराम महोत्सव कथा के चौथे दिन कथा वाचक पंडित मधुसूदन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के अवतार और उनके आदर्श जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना और दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लेते हैं।

केटी न्यूज/केसठ।
प्रखंड के रामपुर गांव में आयोजित श्रीराम महोत्सव कथा के चौथे दिन कथा वाचक पंडित मधुसूदन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के अवतार और उनके आदर्श जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना और दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लेते हैं।कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि चारों राजकुमारों के जन्म से पूरी अयोध्या नगरी हर्षोल्लास से भर उठी थी। राजा दशरथ ने अपने पुत्रों के जन्मोत्सव को बड़े ही उत्साह और भव्यता के साथ मनाया था।

मधुसूदन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सेवा, सत्य और आदर्शों का अनुपम उदाहरण है। उनके जीवन से माता-पिता, गुरु, भाई, मित्र और प्रजा के प्रति सम्मान, कर्तव्यनिष्ठा तथा सदाचार का संदेश मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।चारों भाइयों के जन्मोत्सव प्रसंग पर सोहर, झूमर और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर झूम उठे। पूरे कथा पंडाल में भक्तिमय वातावरण बना रहा। कथा के व्यवस्थापक अजय बच्चन ने बताया कि श्रीराम महोत्सव कथा का समापन 12 जुलाई को होगा।

