गुड फ्राइडे पर डुमरांव का स्वर्गारोहण चर्च बना आस्था का केंद्र, श्रद्धालुओं ने किया त्याग और प्रेम का स्मरण

गुड फ्राइडे के अवसर पर पुराना भोजपुर स्थित स्वर्गारोहण चर्च में आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रभु यीशु के दुख, त्याग और क्रूस पर बलिदान की स्मृति में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और गहरी आस्था के साथ उनके जीवन संदेश को आत्मसात करने का प्रयास किया।

गुड फ्राइडे पर डुमरांव का स्वर्गारोहण चर्च बना आस्था का केंद्र, श्रद्धालुओं ने किया त्याग और प्रेम का स्मरण

__ पवित्र सप्ताह के आयोजन में उमड़ी भीड़, प्रभु यीशु के बलिदान से जीवन में सेवा और समर्पण का संदेश

केटी न्यूज/डुमरांव

गुड फ्राइडे के अवसर पर पुराना भोजपुर स्थित स्वर्गारोहण चर्च में आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रभु यीशु के दुख, त्याग और क्रूस पर बलिदान की स्मृति में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और गहरी आस्था के साथ उनके जीवन संदेश को आत्मसात करने का प्रयास किया।पूरे पवित्र सप्ताह के दौरान चर्च परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इस सप्ताह की शुरुआत खजूर इतवार से हुई, जब श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु के यरूशलेम प्रवेश की स्मृति में खजूर की डालियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली।

यह शोभायात्रा मेरी वार्ड अस्पताल से प्रारंभ होकर भक्तिमय माहौल में चर्च पहुंची, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बन गया।गुरुवार को पवित्र गुरुवार के अवसर पर अंतिम भोज, पाद-पदशालन और युखिरिस्ट आराधना जैसे विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रभु यीशु की विनम्रता, सेवा-भाव और मानवता के प्रति समर्पण का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचाया गया।गुड फ्राइडे के दिन चर्च में विशेष प्रार्थना, वचन-पाठ और उपवास का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने मौन धारण कर प्रभु के कष्ट और बलिदान को याद किया।

वातावरण पूरी तरह से गंभीर और भावनात्मक रहा, जहां हर कोई प्रभु यीशु के प्रेम और त्याग को महसूस करता नजर आया।इस दौरान पटना प्रॉविंस के फादर अलर्बट एसजे और ब्रदर शिल्वुई नाथन एसजे की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की, जबकि पूरे आयोजन का संचालन फादर भास्कर ने किया। उन्होंने बताया कि पवित्र सप्ताह का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रभु यीशु के जीवन मूल्यों—प्रेम, क्षमा और सेवा—को अपने जीवन में अपनाना है।

अब श्रद्धालु शनिवार को शांति और प्रतीक्षा दिवस के रूप में मनाएंगे, जिसमें वे प्रभु के पुनरुत्थान की आशा में प्रार्थना करेंगे। इसके बाद रविवार को पास्का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा, जो प्रभु यीशु के पुनरुत्थान की खुशी का प्रतीक है।पूरे सप्ताह चर्च में लगातार प्रार्थना, मिस्सा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज को प्रेम, शांति और सेवा का संदेश भी देता नजर आया।