गिरिधरबरांव में भक्ति का संगम: प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ से गूंज रहा इलाका
प्रखंड के गिरिधरबरांव गांव इन दिनों गहन धार्मिक आस्था और उत्साह का केंद्र बना हुआ है। यहां 4 मई से शुरू हुआ श्री हनुमत प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ पूरे क्षेत्र में भक्ति की अलख जगा रहा है। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन वैदिक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया है।

__ भागवत कथा, रामलीला और मेले के साथ नौ दिन तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान, 9 को पूर्णाहुति और 10 मई को भंडारा
केटी न्यूज/नवानगर।
प्रखंड के गिरिधरबरांव गांव इन दिनों गहन धार्मिक आस्था और उत्साह का केंद्र बना हुआ है। यहां 4 मई से शुरू हुआ श्री हनुमत प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ पूरे क्षेत्र में भक्ति की अलख जगा रहा है। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन वैदिक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया है।महायज्ञ के अंतर्गत संध्या बेला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। अयोध्या धाम से आईं कथावाचिका सुश्री किशोरी प्रज्ञा पांडे अपने मधुर एवं प्रभावशाली वचनों से श्रोताओं को भावविभोर कर रही हैं।

कथा के दौरान उन्होंने मानव जीवन में सद्भाव, करुणा और परोपकार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सच्चा सौभाग्य उसी व्यक्ति को प्राप्त होता है, जो दूसरों के हित के बारे में सोचता है और अपने व्यवहार से किसी को कष्ट नहीं पहुंचाता।रात्रि में आयोजित रामलीला भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग कथा और रामलीला का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। आयोजन स्थल अब एक छोटे मेले का रूप ले चुका है, जहां विभिन्न प्रकार की दुकानों के साथ झूला, चरखी और अन्य मनोरंजन के साधन बच्चों और युवाओं को खासा आकर्षित कर रहे हैं।

पूरे कार्यक्रम का संचालन आचार्य टुनटुन बाबा के सानिध्य में किया जा रहा है, जिसमें अन्य विद्वान आचार्यों का भी सक्रिय सहयोग मिल रहा है। आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा है, जो तन-मन-धन से इसमें जुटे हैं।समिति के अनुसार, 9 मई को प्राण प्रतिष्ठा और महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी, जबकि 10 मई को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

