चेक डैम टूटने से बढ़ा जल संकट, जांच के घेरे में औद्योगिक इकाई

ब्रह्मपुर (बक्सर)। कांट गांव में चेक डैमों के टूटने का मामला अब जल संकट और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है। शिकायत मिलने के बाद भूमि संरक्षण विभाग ने स्थल का निरीक्षण किया, जिसमें स्पष्ट हुआ कि दोनों डैम प्राकृतिक रूप से नहीं बल्कि मशीनों के जरिए तोड़े गए हैं। इससे इलाके की जल संचयन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

चेक डैम टूटने से बढ़ा जल संकट, जांच के घेरे में औद्योगिक इकाई

केटी न्यूज/ब्रह्मपुर

ब्रह्मपुर (बक्सर)। कांट गांव में चेक डैमों के टूटने का मामला अब जल संकट और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है। शिकायत मिलने के बाद भूमि संरक्षण विभाग ने स्थल का निरीक्षण किया, जिसमें स्पष्ट हुआ कि दोनों डैम प्राकृतिक रूप से नहीं बल्कि मशीनों के जरिए तोड़े गए हैं। इससे इलाके की जल संचयन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पास की एक औद्योगिक इकाई ने ‘सफाई अभियान’ के नाम पर जेसीबी मशीन लगाकर दो अहम चेक डैमों को नष्ट कर दिया। ये डैम आसपास के सैकड़ों किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन थे। इसके अलावा पशुओं और वन्य जीवों के लिए भी यही जल स्रोत था। डैम टूटने के बाद क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत हो गई है, जिससे खेती और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।जांच के दौरान भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने पाया कि दोनों संरचनाएं पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। एक डैम छेरा नदी पर भोजपुर-बक्सर सीमा के पास था, जबकि दूसरा बक्सर जिले के अंदर स्थित था। अधिकारियों ने इसे मानवीय हस्तक्षेप का परिणाम मानते हुए अपनी रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजने की तैयारी की है।

इस बीच, लघु सिंचाई विभाग के पहले दिए गए बयान और बाद में मामले से किनारा करने के रुख ने प्रशासनिक भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि डैम टूटने से न केवल जल संकट गहराया है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।मामले को अब लोक शिकायत के तहत उठाया गया है, जिसमें जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और डैमों के पुनर्निर्माण की मांग की गई है।