लोक शिकायत में खुल रही बिजली विभाग की पोल, गलत बिलिंग से उपभोक्ताओं पर आर्थिक मार

अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय में दर्ज हो रहे मामलों ने कोरानसराय विद्युत आपूर्ति अवर प्रमंडल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अधिक शिकायतें बिजली विभाग के खिलाफ सामने आ रही हैं, जिनका मुख्य कारण गलत बिलिंग और विभागीय स्तर पर सुनवाई का अभाव बताया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ता जब अपनी समस्या लेकर सीधे बिजली कार्यालय पहुंचते हैं, तो न तो उन्हें गंभीरता से सुना जाता है और न ही समय पर समाधान मिलता है।

लोक शिकायत में खुल रही बिजली विभाग की पोल, गलत बिलिंग से उपभोक्ताओं पर आर्थिक मार

केटी न्यूज/डुमरांव

अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय में दर्ज हो रहे मामलों ने कोरानसराय विद्युत आपूर्ति अवर प्रमंडल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अधिक शिकायतें बिजली विभाग के खिलाफ सामने आ रही हैं, जिनका मुख्य कारण गलत बिलिंग और विभागीय स्तर पर सुनवाई का अभाव बताया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ता जब अपनी समस्या लेकर सीधे बिजली कार्यालय पहुंचते हैं, तो न तो उन्हें गंभीरता से सुना जाता है और न ही समय पर समाधान मिलता है। मजबूरन लोगों को लोक शिकायत निवारण कार्यालय का रुख करना पड़ रहा है।

सिमरी प्रखंड के दुल्हपुर पंचायत निवासी हीरालाल चौधरी का मामला इसकी बानगी है। बिजली बिल में गड़बड़ी को लेकर उन्होंने लोक शिकायत कार्यालय में परिवाद दायर किया था। जांच में पाया गया कि उनका बिल एलके एमडी के आधार पर गलत तरीके से तैयार किया गया था। फरवरी 2019 से जुलाई 2025 तक उन पर 56 हजार रुपये का बकाया दिखाया गया था, जबकि सुनवाई के बाद 40 हजार 188 रुपये की राशि में सुधार किया गया। अब उन्हें मात्र 16 हजार 175 रुपये ही जमा करने होंगे।इसी तरह नियाजिपुर गांव निवासी नारायण कुम्हार के मामले में भी भारी गड़बड़ी सामने आई।उनके नाम से जनवरी से दिसंबर के बीच 27 हजार 800 रुपये का बिल भेजा गया था।

लोक शिकायत कार्यालय की जांच के बाद 21 हजार 757 रुपये का सुधार हुआ और अब केवल 6 हजार 50 रुपये का भुगतान शेष है।इन मामलों से स्पष्ट है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आम उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। एसपीजीआरओ ने बताया कि लोक शिकायत कार्यालय में प्रत्येक परिवाद की विधिवत सुनवाई होती है और जांच के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिहार सरकार के प्रधान सचिव का निर्देश है कि कार्यालय स्तर पर सप्ताह में दो दिन शिकायतों की सुनवाई कर समाधान किया जाए, तो फिर उपभोक्ताओं को लोक शिकायत कार्यालय तक क्यों जाना पड़ रहा है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने विभागीय जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।