चापाकलों की मरम्मत में नप बरत रहा लापरवाही, कुल 286 चापाकल नप के विभिन्न वार्डों में लगाए गए हैं, जिसमें अधिक खराब
जमीन के भीतर पानी के लेयर नीचे भागता जा रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इधर सरकार ने नया चापाकल लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि जो खराब पड़े चापाकल हैं, उसे बनाया जा सकता है। नगर परिषद खराब पड़े चापाकलों को बनाने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दिया है। मालूम हो कि नगर परिषद क्षेत्र में कुल 286 चापाकल लगाए गए थे, जिसमें अधिकांश खराब हो गए है।
केटी न्यूज/डुमरांव
जमीन के भीतर पानी के लेयर नीचे भागता जा रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इधर सरकार ने नया चापाकल लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि जो खराब पड़े चापाकल हैं, उसे बनाया जा सकता है। नगर परिषद खराब पड़े चापाकलों को बनाने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दिया है। मालूम हो कि नगर परिषद क्षेत्र में कुल 286 चापाकल लगाए गए थे, जिसमें अधिकांश खराब हो गए है। इतना ही नहीं कितने का तो अस्तित्व ही मीट गया है। इस संबंध में नप के कार्यवाहक चेयरमैन विकास ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सरकार के आदेश के आलोक में चापाकल तो नहीं लगाए जा रहे हैं, लेकिन जरूरत के अनुसार बोरिंग लगाकर घर-घर पानी पहुंचाने पाइप का जाल बिछाया जा रहा है।

विस्तारित क्षेत्र और डुमरांव शहर मिलाकर पांच जलमीनार स्थापित किये गए हैं, जिसमें दो कार्य ही नहीं करते हैं, लिहाजा सीधे बोरिंग से पानी घर-घर पहुंचाया जाता है। इधर नगरवासियों का कहना है कि जब जलमीनार से पानी की आपूर्ति होती थी, तो दो मंजिला घरों तक भी पानी पहुंच जाता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि मुख्य सड़क छोड़ दिया जाए तो गली में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। डुमरांव शहर के विभिन्न मोहल्लों में लगभग तीन दर्जन बोरिंग लगाए गए हैं, जिससे पानी का आपूर्ति घरों में होती है। इस संबंध में नप ईओ से बात की गई तो उन्होंने बताया की छठिया पोखरा व ट्रेनिंग स्कूल के जलमीनार से पानी की आपूर्ति की जाती है।

पहले नगर की पानी आपूर्ति की व्यवस्था पीएचईडी के जिम्मे था, अब नगर परिषद को हैंडओवर हो गया है। जलापूर्ति जब से नप के पास आया है, लीकेज को पाइप को सही किया जा रहा है। कोई उपभोक्त शिकायत करता है तो उस पर त्वरित निष्पादन के लिये मिस्त्री को भेजा जाता है। जरूरत के अनुसार मोहल्लों में बोरिंग लगाने का काम भी किया जाता है, जिससे परिवारों को भटकना नहीं पड़े।
