तिरंगे में लिपटा लौटा देश का सपूत, नम आंखों से खरगपुरा ने दी अंतिम विदाई
चौसा प्रखंड के डिहरी पंचायत स्थित खरगपुरा गांव शुक्रवार को गम और गर्व के अनूठे भाव से भर उठा। देश की सुरक्षा में करीब चार दशक तक सेवा देने वाले सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल अयूब अंसारी का पार्थिव शरीर गुरुवार की देर रात तिरंगे में लिपटा जब पैतृक गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो गई।

__ चार दशक तक सीआरपीएफ में रहकर देश की सेवा करने वाले हेड कांस्टेबल अयूब अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया, गांव में गूंजे भारत माता की जय के नारे
केटी न्यूज/चौसा।
चौसा प्रखंड के डिहरी पंचायत स्थित खरगपुरा गांव शुक्रवार को गम और गर्व के अनूठे भाव से भर उठा। देश की सुरक्षा में करीब चार दशक तक सेवा देने वाले सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल अयूब अंसारी का पार्थिव शरीर गुरुवार की देर रात तिरंगे में लिपटा जब पैतृक गांव पहुंचा तो हर आंख नम हो गई। गांव की गलियों में जहां परिजनों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी, वहीं वीर सपूत के सम्मान में ‘भारत माता की जय’ और ‘अयूब अंसारी अमर रहें’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।सीआरपीएफ जवानों और राजपुर थाना पुलिस की मौजूदगी में पार्थिव शरीर गांव लाया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए रात में ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। जिप सदस्य पूजा देवी, पलिया बीडीसी प्रतिनिधि लड्डू यादव, मुखिया कल्लू अंसारी सहित कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने पहुंचकर वीर जवान को श्रद्धांजलि दी।

तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखते ही परिजनों का धैर्य टूट गया। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।शुक्रवार को पूरे सम्मान के साथ गांव के कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान विभागीय अधिकारियों और सीआरपीएफ जवानों ने अंतिम सलामी देकर देश के इस सपूत को विदाई दी। अंतिम विदाई के वक्त मौजूद हर शख्स की आंखों में आंसू थे, लेकिन अयूब अंसारी के देश सेवा के जज्बे पर ग्रामीणों को गर्व भी था।बताया जाता है कि अयूब अंसारी वर्ष 1985 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। करीब 40 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। वर्तमान में वे सीआरपीएफ की 144वीं बटालियन में जहांगीर चौक, जम्मू में तैनात थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

उनके निधन की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री सहित पूरा परिवार गहरे सदमे में है। गांव के लोगों का कहना था कि अयूब अंसारी ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सुरक्षा के नाम कर दिया। उनका जाना केवल परिवार की क्षति नहीं, बल्कि खरगपुरा और पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब गांव से अंतिम सफर पर निकला तो माहौल एक साथ शोक और राष्ट्रभक्ति से भर गया। नम आंखों से ग्रामीणों ने विदा लेते हुए अपने वीर सपूत को सलाम किया।

