समुदाय की भागीदारी से बदलेगी स्कूलों की तस्वीर, डुमरांव में शिक्षा समिति प्रशिक्षण संपन्न
डुमरांव प्रखंड में आयोजित तीन दिवसीय गैर-आवासीय सामुदायिक प्रतिनिधि सह विद्यालय शिक्षा समिति (वीएसएस) सदस्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रम ने शिक्षा को लेकर एक नई सोच को जन्म दिया है। गुरुवार को संपन्न हुए इस प्रशिक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि विद्यालयों की गुणवत्ता और बच्चों का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं या शिक्षकों के भरोसे नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संवर सकता है।
-- तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर उभरा संदेश, विद्यालय केवल इमारत नहीं, समाज की साझा जिम्मेदारी
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव प्रखंड में आयोजित तीन दिवसीय गैर-आवासीय सामुदायिक प्रतिनिधि सह विद्यालय शिक्षा समिति (वीएसएस) सदस्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रम ने शिक्षा को लेकर एक नई सोच को जन्म दिया है। गुरुवार को संपन्न हुए इस प्रशिक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि विद्यालयों की गुणवत्ता और बच्चों का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं या शिक्षकों के भरोसे नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संवर सकता है।राज उच्च विद्यालय, महारानी उषारानी बालिका उच्च विद्यालय सहित अरियांव, लाखनडिहरा, नंदन, कुशलपुर, अटांव, सोवां, करूअज और पुराना भोजपुर जैसे क्षेत्रों के कुल 18 विद्यालय काम्प्लेक्सों से जुड़े शिक्षा समिति सदस्यों ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने पहली बार यह समझा कि वे केवल औपचारिक सदस्य नहीं, बल्कि विद्यालय व्यवस्था के मजबूत स्तंभ हैं।कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन, शैक्षणिक वातावरण में सुधार, बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ड्रॉपआउट रोकने और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि यदि शिक्षा समिति सक्रिय हो जाए तो विद्यालय विकास योजना कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई देने लगती है।प्रशिक्षक संदीप आर्य, आफताब आलम, नेहा दीक्षित, दुर्गमांगे, राधेश्याम चौधरी, गिरीश कुमार पांडेय और प्रकृति कुमारी ने प्रशिक्षण सत्रों में सहभागियों को निगरानी, मूल्यांकन और पारदर्शिता के व्यावहारिक तरीके बताए।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा समिति विद्यालय और अभिभावकों के बीच भरोसे का सेतु बन सकती है, जिससे बच्चों के सीखने का माहौल मजबूत होगा।अरियांव काम्प्लेक्स में आयोजित समापन सत्र प्रशिक्षण का सबसे भावनात्मक क्षण रहा। प्रशिक्षिका नम्रता मिश्रा ने ‘एक चिंगारी का दृष्टांत’ के जरिए यह संदेश दिया कि बदलाव की शुरुआत छोटी पहल से होती है। उनके संबोधन ने उपस्थित सदस्यों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने कहा कि विद्यालयों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा समिति सदस्यों की सतत सक्रियता जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रशिक्षण केवल जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव विद्यालयों की कार्यसंस्कृति और बच्चों की शिक्षा में भी साफ दिखाई देगा।

