भुगतान में देरी से मनरेगा मजदूरों की बढ़ी मुश्किलें, दो माह से अटकी मेहनताना राशि
चौसा प्रखंड सहित जिले के विभिन्न पंचायतों में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को पिछले लगभग दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं मिल पाया है। भुगतान में हो रही देरी के कारण मजदूरों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा है। महंगाई के इस दौर में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बनता जा रहा है।
केटी न्यूज/चौसा
चौसा प्रखंड सहित जिले के विभिन्न पंचायतों में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को पिछले लगभग दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं मिल पाया है। भुगतान में हो रही देरी के कारण मजदूरों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा है। महंगाई के इस दौर में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बनता जा रहा है।जानकारी के अनुसार, जनवरी और फरवरी महीने में मनरेगा के तहत कई विकास कार्य कराए गए, जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूरों ने भाग लिया। मजदूरों ने तालाब खुदाई, सड़क मरम्मत, मिट्टी भराई सहित अन्य कार्यों में मेहनत की, लेकिन अब तक उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है।

इससे मजदूरों में असंतोष भी बढ़ रहा है।पवनी पंचायत के मनरेगा मजदूर केसबिहारी राम, रामप्रवेश चौधरी, मीनू देवी और उर्मिला देवी सहित अन्य मजदूरों ने बताया कि उन्होंने निर्धारित अवधि में लगातार काम किया, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें एक भी रुपये का भुगतान नहीं मिला है। मजदूरों का कहना है कि घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और दवा-इलाज जैसी जरूरी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवारों को मजबूरी में उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है।

मजदूरों के अनुसार यह समस्या केवल चौसा प्रखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी मनरेगा मजदूरों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से जल्द बकाया मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की है।इस संबंध में मनरेगा पदाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि विभागीय स्तर पर फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान में विलंब हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही विभाग को राशि प्राप्त होगी, सभी मजदूरों की लंबित मजदूरी का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कर दिया जाएगा।

