उर्दू भाषा के संवर्धन का सशक्त मंच बना नगर भवन, कार्यशाला, सेमिनार व मुशायरा गरिमामय माहौल में संपन्न
जिला उर्दू भाषा कोषांग के तत्वावधान में नगर भवन, बक्सर में आयोजित उर्दू कार्यशाला, सेमिनार एवं मुशायरा का आयोजन अत्यंत सफल एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों, साहित्यकारों, शायरों एवं भाषा प्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
केटी न्यूज/बक्सर
जिला उर्दू भाषा कोषांग के तत्वावधान में नगर भवन, बक्सर में आयोजित उर्दू कार्यशाला, सेमिनार एवं मुशायरा का आयोजन अत्यंत सफल एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों, साहित्यकारों, शायरों एवं भाषा प्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी साहिला द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त बक्सर, विशेष कार्य पदाधिकारी, नजारत उप समाहर्ता, वरीय उप समाहर्ता, प्रभारी पदाधिकारी सह वरीय उप समाहर्ता सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।अपने उद्घाटन संबोधन में जिला पदाधिकारी ने कहा कि उर्दू भाषा गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक जीवंत और समृद्ध पहचान है।

उन्होंने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुशायरा, सेमिनार और कार्यशाला जैसे आयोजन उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उप विकास आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू भाषा हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने स्वयं एक कवयित्री के रूप में अपनी रचना को भावपूर्ण एवं प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की। उन्होंने कहा कि उर्दू की मिठास और अभिव्यक्ति की ताकत इसे विशेष बनाती है।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे भाषा-संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल बताया। स्थानीय शायरों, वक्ताओं एवं साहित्य प्रेमियों ने उर्दू भाषा के साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला उर्दू भाषा कोषांग, बक्सर के कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष रूप से मो. अमानुल्लाह, उर्दू अनुवादक, अलीयुन हैदरी सहित अन्य कर्मियों ने समन्वय एवं व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया। यह आयोजन उर्दू भाषा, साहित्य और गंगा-जमुनी तहज़ीब को सशक्त करने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल साबित हुआ।

