एमवीयू 1962 की तत्परता ने बचाई गर्भवती गाय की जान
सिमरी प्रखंड के सरकारी मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा एमवीयू 1962 की तत्परता और समर्पण ने एक गर्भवती गाय की जान बचाकर पशुपालकों के बीच विश्वास को और मजबूत कर दिया है। यह घटना न केवल पशु चिकित्सा सेवाओं की उपयोगिता को दर्शाती है, बल्कि समय पर सही उपचार के महत्व को भी रेखांकित करती है।
-- पांच दिन के इलाज के बाद खुद खड़ी हुई गाय, स्वस्थ बछड़े को दिया जन्म
केटी न्यूज/सिमरी
सिमरी प्रखंड के सरकारी मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा एमवीयू 1962 की तत्परता और समर्पण ने एक गर्भवती गाय की जान बचाकर पशुपालकों के बीच विश्वास को और मजबूत कर दिया है। यह घटना न केवल पशु चिकित्सा सेवाओं की उपयोगिता को दर्शाती है, बल्कि समय पर सही उपचार के महत्व को भी रेखांकित करती है।जानकारी के अनुसार, नियाजीपुर निवासी पशुपालक रोहित पाठक की गर्भवती गाय, जो लगभग दस दिनों के भीतर बछड़ा देने वाली थी, परिवहन के दौरान अचानक फिसलकर गिर गई।

हादसे के बाद गाय उठ नहीं पा रही थी। लगातार दो से तीन दिनों तक स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। दिन बीतने के साथ गाय की स्थिति और गंभीर होती चली गई, जिससे उसकी जान पर संकट गहराने लगा।अंततः निराश पशुपालक ने एमवीयू 1962 पर संपर्क किया। सूचना मिलते ही एमवीयू 1962 सिमरी (बक्सर) की टीम बिना देर किए मौके पर पहुंची। टीम का नेतृत्व पशु चिकित्सक डॉ. पीयूष यादव ने किया। उनके साथ पैरावेट दिनेश कुमार सिंह और पायलट राहुल रंजन सिंह भी मौजूद रहे।

टीम ने गाय की स्थिति का गहन परीक्षण कर वैज्ञानिक पद्धति से इलाज शुरू किया। लगातार पांच दिनों तक नियमित मॉनिटरिंग, दवाइयों, सहायक देखभाल और उचित प्रबंधन के माध्यम से इलाज किया गया। कठिन परिश्रम और समर्पित सेवा का परिणाम यह रहा कि पांचवें दिन गाय स्वयं खड़ी हो गई। यह दृश्य देखकर पशुपालक ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।इलाज के मात्र दो दिन बाद ही गाय ने स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया। वर्तमान में गाय और बछड़ा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। भावुक पशुपालक रोहित पाठक ने कहा कि यदि एमवीयू 1962 की सेवा समय पर नहीं मिलती, तो गाय को बचा पाना बेहद मुश्किल होता।

उन्होंने पूरी टीम के प्रति आभार जताते हुए इसे जीवनदायिनी सेवा बताया।इस पूरे अभियान में जिला समन्वयक अग्निवेश कुमार की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। उनके प्रभावी समन्वय, मार्गदर्शन और त्वरित व्यवस्था के कारण पशु चिकित्सा टीम समय पर और प्रभावी ढंग से सेवा दे सकी।यह घटना सरकारी मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा (1962) की उपयोगिता और प्रभावशीलता का जीवंत उदाहरण है, जिसने समय पर हस्तक्षेप कर न केवल एक गर्भवती गाय की जान बचाई, बल्कि एक स्वस्थ बछड़े के जन्म के साथ पशुपालक के चेहरे पर मुस्कान भी लौटा दी।

