सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डुमरांव उप प्रमुख चुनाव की जंग तेज

डुमरांव प्रखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी (सिविल) संख्या 12490/2024 में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के पूर्व स्थगन आदेश को निलंबित किए जाने के बाद प्रमुख एवं उप प्रमुख पद को लेकर सत्ता संतुलन की नई जंग शुरू होती दिख रही है। न्यायालय के ताजा आदेश ने लंबे समय से लंबित राजनीतिक गतिरोध को नई दिशा दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डुमरांव उप प्रमुख चुनाव की जंग तेज

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव प्रखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी (सिविल) संख्या 12490/2024 में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के पूर्व स्थगन आदेश को निलंबित किए जाने के बाद प्रमुख एवं उप प्रमुख पद को लेकर सत्ता संतुलन की नई जंग शुरू होती दिख रही है। न्यायालय के ताजा आदेश ने लंबे समय से लंबित राजनीतिक गतिरोध को नई दिशा दे दी है।गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2024 को प्रखंड प्रमुख एवं उप प्रमुख के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी मतों से पारित हुआ था। इसके बाद प्रमुख ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगा दी गई थी।

इस रोक के कारण पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के स्थगन आदेश को निलंबित किए जाने से अविश्वास प्रस्ताव फिर प्रभावी होता नजर आ रहा है।इसी क्रम में कोरानसराय पंचायत की बीडीसी सदस्य सबिता पासवान ने बुधवार शाम कार्यपालक पदाधिकारी सह बीडीओ को आवेदन देकर प्रमुख एवं उप प्रमुख पद को शक्तिमुक्त घोषित करने और पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 40(1)(ग) के तहत कार्यवाहक प्रमुख के चयन की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जब तक राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की तिथि घोषित नहीं की जाती, तब तक प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए कार्यवाहक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

बताया जाता है कि अक्टूबर 2024 में सबिता पासवान की अध्यक्षता में 18 पंचायत समिति सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने की संभावना है। प्रखंड में प्रमुख एवं उप प्रमुख के चुनाव को लेकर अंदरखाने बैठकों और रणनीति का दौर शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में डुमरांव की सियासत और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।