सफाई पर हर महीने 90 लाख खर्च, फिर भी बदहाल डुमरांव
डुमरांव नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रही है। विडंबना यह है कि सफाई और कचरा प्रबंधन पर हर महीने करीब 90 लाख रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की हालत बद से बदतर बनी हुई है। गर्मी के मौसम में भी कई मोहल्लों की नालियां ओवरफ्लो कर रही हैं, सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है और जगह-जगह खुले में कूड़ा फेंके जाने से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।


__ गर्मी में उफन रहीं नालियां, सड़कों पर जलजमाव और खुले में कचरे से बढ़ा संक्रमण का खतरा
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रही है। विडंबना यह है कि सफाई और कचरा प्रबंधन पर हर महीने करीब 90 लाख रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की हालत बद से बदतर बनी हुई है। गर्मी के मौसम में भी कई मोहल्लों की नालियां ओवरफ्लो कर रही हैं, सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है और जगह-जगह खुले में कूड़ा फेंके जाने से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।नगर परिषद की लापरवाही का सबसे खराब असर वार्ड संख्या 20 स्थित ढेलवानी मोहल्ले में देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां महीनों से नालियों की सफाई नहीं कराई गई है। नतीजतन नालियों का गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है और इलाके में तेज बदबू से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। गंदगी और जलजमाव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय निवासी जैनुल होदा ने नगर परिषद पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के बावजूद न तो नालियों की सफाई हो रही है और न ही कचरे का नियमित उठाव किया जा रहा है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।सिर्फ ढेलवानी मोहल्ला ही नहीं, बल्कि स्टेशन रोड स्थित दलित बस्ती के आसपास भी हालात बेहद खराब हैं। यहां नाली का पानी ओवरफ्लो होकर मुख्य सड़क पर फैल जाता है, जिससे सालोंभर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार नगर परिषद के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

शहर के कई अन्य हिस्सों में भी खुले में कूड़ा-कचरा फेंका जा रहा है। नियमित कचरा उठाव नहीं होने से खाली पड़े भूखंड और सड़क किनारे अस्थायी डंपिंग जोन में तब्दील होते जा रहे हैं। इससे न सिर्फ शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि मच्छरों और बदबू की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।गौरतलब है कि डुमरांव नगर परिषद पर पहले भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन के उल्लंघन के आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।

वहीं, फल और सब्जी विक्रेताओं की लापरवाही भी गंदगी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। बाजारों में दुकानदार खुलेआम सड़े-गले फल, सब्जियों के अवशेष और अन्य कचरे को सड़कों व नालियों में फेंक रहे हैं। इससे नालियां जाम हो रही हैं और गंदगी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले पर नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। शहर में सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर न तो सख्ती दिखाई दे रही है और न ही जवाबदेही तय की जा रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर हर महीने खर्च हो रहे 90 लाख रुपये आखिर जा कहां रहे हैं।

