खिरौली में जश्न, संस्कृति और सुरों का संगम: जन्मोत्सव बना यादगार उत्सव

डुमरांव प्रखंड के खिरौली गांव में शुक्रवार की शाम उत्सव, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनोखा संगम देखने को मिला। एक पारिवारिक अवसर ने पूरे गांव को उत्सवी रंग में रंग दिया, जब स्थानीय स्तर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को एक साथ जोड़ दिया। रॉबिन चतुर्वेदी के पुत्र राघव के प्रथम जन्मोत्सव के मौके पर आयोजित इस भव्य आयोजन में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भारी उपस्थिति ने माहौल को खास बना दिया।

खिरौली में जश्न, संस्कृति और सुरों का संगम: जन्मोत्सव बना यादगार उत्सव

__ लोकगीतों की धुन पर झूम उठा गांव, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में देर रात तक चला कार्यक्रम

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव प्रखंड के खिरौली गांव में शुक्रवार की शाम उत्सव, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनोखा संगम देखने को मिला। एक पारिवारिक अवसर ने पूरे गांव को उत्सवी रंग में रंग दिया, जब स्थानीय स्तर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को एक साथ जोड़ दिया। रॉबिन चतुर्वेदी के पुत्र राघव के प्रथम जन्मोत्सव के मौके पर आयोजित इस भव्य आयोजन में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भारी उपस्थिति ने माहौल को खास बना दिया।कार्यक्रम में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे, जबकि डुमरांव विधायक राहुल कुमार सिंह सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी शामिल हुए। उनकी मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

आयोजन की जिम्मेदारी पूर्व पार्षद विनोद कुमार चौबे और उनके परिवार ने संभाली, जिन्होंने इसे यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।सांस्कृतिक संध्या का आकर्षण लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां रहीं। भोजपुर क्षेत्र के चर्चित लोकगायकों ने मंच संभालते ही माहौल को जीवंत कर दिया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक धुनों और देसी अंदाज में सजे गीतों ने गांव की मिट्टी की खुशबू को मंच तक पहुंचाया। दर्शकों की तालियों और उत्साह ने कलाकारों का हौसला बढ़ाया, जिससे कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम होते हैं और लोक संस्कृति को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

वहीं विधायक ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण परिवेश में इस तरह के कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब परंपरा, उत्सव और सामूहिक भागीदारी एक साथ आते हैं, तो गांव की पहचान और भी मजबूत हो जाती है। खिरौली का यह सांस्कृतिक उत्सव न सिर्फ एक जन्मदिन समारोह रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।