बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की संदिग्ध स्थिति में मौत, परिजनों ने सदर अस्पताल में काटा बवाल,

केंद्रीय कारा बक्सर में बंद एक 32 वर्षीय बंदी की संदिग्ध मौत के बाद शुक्रवार को शहर का माहौल गरमा गया। सुबह करीब सात बजे तबीयत बिगड़ने के बाद बंदी की मौत की सूचना मिलते ही जेल कर्मियों ने शव को सदर अस्पताल पहुंचाया। लेकिन जैसे ही परिजन अस्पताल पहुंचे, उन्होंने हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की संदिग्ध स्थिति में मौत, परिजनों ने सदर अस्पताल में काटा बवाल,

__  हत्या का आरोप लगाकर परिजनों का अस्पताल में हंगामा

__ मारपीट के निशान और शव को ‘लावारिस’ छोड़ने का आरोप, जांच टीम गठन की बात

केटी न्यूज/बक्सर 

केंद्रीय कारा बक्सर में बंद एक 32 वर्षीय बंदी की संदिग्ध मौत के बाद शुक्रवार को शहर का माहौल गरमा गया। सुबह करीब सात बजे तबीयत बिगड़ने के बाद बंदी की मौत की सूचना मिलते ही जेल कर्मियों ने शव को सदर अस्पताल पहुंचाया। लेकिन जैसे ही परिजन अस्पताल पहुंचे, उन्होंने हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।मृतक की पहचान जेल नगर पइन रोड निवासी केदार सिंह के पुत्र राजेंद्र प्रसाद के रूप में हुई है। उन्हें 12 फरवरी को शराब बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

जेल सूत्रों के अनुसार तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल वार्ड में रखा गया था, जहां शुक्रवार की सुबह अचानक हालत बिगड़ी और मौत हो गई।परिजनों का आरोप है कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। मृतक के भाई राजू कुमार ने कहा कि दो दिन पहले ही वह जेल में राजेंद्र से मिलकर आए थे और उस समय उनकी हालत सामान्य थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर तबीयत खराब थी तो हमें सूचना क्यों नहीं दी गई। शव को अस्पताल में लावारिस की तरह क्यों छोड़ दिया गया। मृतक की बहन रीना कुमारी ने आरोप लगाया कि राजेंद्र को आधी रात घर से गिरफ्तार किया गया और बेरहमी से मारपीट की गई।

उन्होंने कहा कि उनके शरीर पर चोट के निशान थे, जिससे स्पष्ट है कि उनके साथ हिंसा हुई। उन्होंने कहा कि मृतक के दो छोटे बच्चे हैं और परिवार को न्याय मिलना चाहिए।घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ गौरव पांडेय, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह और अंचलाधिकारी अस्पताल पहुंचे। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। एसडीपीओ ने कहा कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएंगे।

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अभिमन्यु कुशवाहा ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि आवश्यकता हो तो मानवाधिकार आयोग से भी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन सवाल बरकरार है क्या यह महज तबीयत बिगड़ने से हुई मौत है या फिर बंदी की मौत के पीछे कोई और कहानी छिपी है। प्रशासनिक जांच के नतीजे अब पूरे जिले की निगाहों में हैं।