प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ता 9 एकड़ का ऐतिहासिक तालाब, पर्यावरण मंत्री से लगी गुहार
उच्च न्यायालय के निर्देश और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत बिहार भर में आहर-पोखरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है। रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम के समीप लगभग 9 एकड़ में फैला ऐतिहासिक सरकारी तालाब आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
-- जल-जीवन-हरियाली योजना के बावजूद रघुनाथपुर का सरकारी तालाब अतिक्रमण और गंदगी में घिरा
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
उच्च न्यायालय के निर्देश और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत बिहार भर में आहर-पोखरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है। रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम के समीप लगभग 9 एकड़ में फैला ऐतिहासिक सरकारी तालाब आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।अतिक्रमण, गंदगी और जलकुंभी की भरमार से तालाब का जल क्षेत्र लगातार सिमटता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंचल कार्यालय ब्रह्मपुर द्वारा कभी-कभार अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, लेकिन संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर कोई ठोस व दीर्घकालिक योजना अब तक नहीं बनाई गई है।

यह तालाब पहले नहर और आहर से जुड़ा हुआ था, जिससे बाढ़ के पानी का प्राकृतिक भंडारण होता था। बरसात के मौसम में यह तालाब लबालब भर जाता था और आसपास के किसान इसी जल से खेतों की सिंचाई करते थे। समय के साथ यह महत्वपूर्ण जलस्रोत उपेक्षा का शिकार होता चला गया और आज इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो चुकी है।तालाब के ठीक समीप स्थित तुलसी आश्रम का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व देशभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहीं महर्षि गोस्वामी तुलसीदास ने तपस्या की थी और रामचरितमानस के अंशों की रचना की थी।

यदि आश्रम के पास स्थित इस 9 एकड़ के तालाब को संरक्षित कर वेटलैंड के रूप में विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र एक आदर्श पर्यावरण-पर्यटन केंद्र बन सकता है।पर्यावरण कार्यकर्ता शैलेश ओझा ने हाल ही में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी से मुलाकात कर तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने, चारों ओर वृक्षारोपण कराने और सौंदर्यीकरण की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि तालाब के पुनर्जीवन से जल संरक्षण, जैव विविधता, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ओर कब ठोस कदम उठाता है।

