Wednesday, 4 November 2026
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तीन साल का इंतज़ार खत्म: डुमरांव थानाध्यक्ष के प्रयासों ने मिलाया बिछड़ा भाई, छलक पड़ी आंखें

कभी-कभी उम्मीदें टूट जाती हैं, लेकिन चमत्कार जैसी घटनाएं फिर से भरोसा जगा देती हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला डुमरांव में सामने आया, जहां तीन साल से लापता युवक को डुमरांव थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने उसके परिवार से मिलाकर एक बिखरे रिश्ते को फिर से जोड़ दिया।

तीन साल का इंतज़ार खत्म: डुमरांव थानाध्यक्ष के प्रयासों ने मिलाया बिछड़ा भाई, छलक पड़ी आंखें

-- मानसिक रूप से अस्थिर युवक को पहचान दिलाकर परिवार तक पहुंचाया, बड़े भाई ने कहा मैने “उम्मीद छोड़ दी थी”

केटी न्यूज/डुमरांव

कभी-कभी उम्मीदें टूट जाती हैं, लेकिन चमत्कार जैसी घटनाएं फिर से भरोसा जगा देती हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला डुमरांव में सामने आया, जहां तीन साल से लापता युवक को डुमरांव थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने उसके परिवार से मिलाकर एक बिखरे रिश्ते को फिर से जोड़ दिया।मध्यप्रदेश के सिद्धि जिले के जकीरा टोला गांव का रहने वाला 27 वर्षीय छोटू कौल तीन साल पहले रोज़गार की तलाश में वाराणसी गया था। शुरुआत में उसने फल का ठेला लगाकर अपना गुज़ारा किया, लेकिन वक्त के साथ उसकी ज़िंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि वह मानसिक रूप से असंतुलित हो गया।

तीन साल का इंतज़ार खत्म: डुमरांव थानाध्यक्ष के प्रयासों ने मिलाया बिछड़ा भाई, छलक पड़ी आंखें

धीरे-धीरे वह अपने ही लोगों से दूर होता चला गया और एक दिन अचानक लापता हो गया।परिवार ने हर संभव कोशिश की। वाराणसी की गलियों से लेकर कई शहरों तक उसकी तलाश की गई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। वक्त बीतता गया और उम्मीदें भी धीरे-धीरे टूटने लगीं।इसी बीच, डुमरांव में एक सूचना ने कहानी का रुख बदल दिया। बंझू डेरा के पास एक युवक संदिग्ध हालत में घूमता मिला, जो अपना नाम-पता ठीक से नहीं बता पा रहा था। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और युवक को थाने लाया गया।युवक की हालत देखकर यह साफ था कि वह मानसिक रूप से अस्थिर है।

तीन साल का इंतज़ार खत्म: डुमरांव थानाध्यक्ष के प्रयासों ने मिलाया बिछड़ा भाई, छलक पड़ी आंखें

ऐसे में उसकी पहचान करना आसान नहीं था। लेकिन थानाध्यक्ष ने संवेदनशीलता और धैर्य का परिचय देते हुए उसे न सिर्फ सुरक्षित रखा, बल्कि भोजन और देखभाल भी कराई। लगातार प्रयासों के बाद युवक ने केवल अपने जिले और थाना का नाम बताया, यहीं से उम्मीद की एक नई किरण जगी।पुलिस ने इस छोटे से सुराग को आधार बनाकर मध्यप्रदेश के सिद्धि जिले के रामपुर थाना से संपर्क किया। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार युवक की पहचान छोटू कौल के रूप में हुई और उसके परिवार का पता लगाया गया।जब बड़े भाई पंकज कौल को यह खबर मिली, तो जैसे उसकी दुनिया ही बदल गई।

तीन साल का इंतज़ार खत्म: डुमरांव थानाध्यक्ष के प्रयासों ने मिलाया बिछड़ा भाई, छलक पड़ी आंखें

तीन साल से जिस भाई की तलाश में वह दर-दर भटक रहा था, अब उसके मिलने की उम्मीद फिर से जाग उठी। गुरुवार को वह अपने एक रिश्तेदार के साथ डुमरांव पहुंचा।थाने में जैसे ही उसकी नजर अपने छोटे भाई पर पड़ी, वह खुद को रोक नहीं सका, आंखों से आंसू बह निकले। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि टूटे रिश्ते के फिर से जुड़ने का पल था।पंकज ने भावुक होकर बताया कि उसने अपने भाई को हर जगह खोजा, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। मीडिया के सामने उसने कहा “हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन पुलिस के प्रयास ने हमारा परिवार फिर से जोड़ दिया’’।

तीन साल का इंतज़ार खत्म: डुमरांव थानाध्यक्ष के प्रयासों ने मिलाया बिछड़ा भाई, छलक पड़ी आंखें

आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पंकज अपने भाई को साथ लेकर घर लौट गया। जाते-जाते उसने डुमरांव थानाध्यक्ष और उनकी टीम को दिल से धन्यवाद दिया।यह घटना सिर्फ एक लापता युवक के मिलने की नहीं, बल्कि पुलिस की मानवीय संवेदना और एक परिवार की टूटी उम्मीदों के फिर से जुड़ने की कहानी है।

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