शनिचरा बाबा के वार्षिक पूजनोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, देर रात तक लगा रहा मेला

डुमरांव स्टेशन रोड स्थित राज हाई स्कूल के ठीक सामने स्थित शनिचरा बाबा मंदिर परिसर में वार्षिक पूजनोत्सव धार्मिक आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। तुरहा समाज की ओर से आयोजित इस वार्षिक पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही।

शनिचरा बाबा के वार्षिक पूजनोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, देर रात तक लगा रहा मेला

__ वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलगीतों के बीच हुआ पूजन, श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर टेका मत्था; मेले में बच्चों ने उठाया आनंद

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव स्टेशन रोड स्थित राज हाई स्कूल के ठीक सामने स्थित शनिचरा बाबा मंदिर परिसर में वार्षिक पूजनोत्सव धार्मिक आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। तुरहा समाज की ओर से आयोजित इस वार्षिक पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही।

पूजनोत्सव के दौरान न्याय के देवता भगवान शनिदेव की विधिवत पूजा-अर्चना वैदिक विधान के साथ कराई गई। आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई गई, वहीं महिलाओं ने मंगलगीत गाकर धार्मिक माहौल को और भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने शनिचरा बाबा के दरबार में मत्था टेककर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मान्यता के अनुसार भगवान शनिदेव न्याय के देवता हैं

और श्रद्धापूर्वक उनकी आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचे। पूजा को लेकर मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में विशेष सजावट की गई थी। सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। पूजा-अर्चना के बाद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान शनिदेव का आशीर्वाद लिया।

पूजनोत्सव के अवसर पर मंदिर के बाहर मेले का भी आयोजन किया गया था। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें और बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले आदि लगाए गए थे। पूजा के बाद बड़ी संख्या में परिवार मेले का आनंद लेने पहुंचे। बच्चे झूलों और अन्य मनोरंजन साधनों का लुत्फ उठाते नजर आए। देर रात तक मेला परिसर में चहल-पहल बनी रही।

वार्षिक पूजनोत्सव ने धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सौहार्द और सामूहिक सहभागिता का भी संदेश दिया। आयोजन को सफल बनाने में तुरहा समाज के सदस्यों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।