धान से लदा ट्रैक्टर पलटा, सिस्टम के दलदल में फंसी सड़क: 10 घंटे जाम ने खोली प्रशासनिक लापरवाही की पोल
हेठुआ–भलुहा मुख्य पथ पर नोनौरा गांव के पास धान लदे ट्रैक्टर के पलटने की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया। यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि वर्षों से अनदेखी झेल रही समस्या का विस्फोट था, जिसने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया।
केटी न्यूज/राजपुर
हेठुआ–भलुहा मुख्य पथ पर नोनौरा गांव के पास धान लदे ट्रैक्टर के पलटने की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया। यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि वर्षों से अनदेखी झेल रही समस्या का विस्फोट था, जिसने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया।हेठुआ गांव निवासी जयप्रकाश सिंह उर्फ भिखारी सिंह धान की फसल ट्रैक्टर पर लादकर जा रहे थे। नोनौरा गांव के समीप पहुंचते ही पीसीसी सड़क पर जमा गंदे पानी और दलदली हालत के कारण ट्रैक्टर असंतुलित होकर पलट गया।

गनीमत रही कि उस समय आसपास कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था। चालक की सूझबूझ से जान बची, लेकिन किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों का सब्र टूट गया। सड़क पर उतरकर ग्रामीणों ने करीब 10 घंटे तक मुख्य पथ को जाम कर दिया। चंदन सिंह, जितेंद्र सिंह, मंटू शुक्ला, वार्ड सदस्य प्रकाश तिवारी, सरपंच उपेंद्र पासवान समेत ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से गांव के पास लगभग 500 मीटर तक सड़क पर जलजमाव बना हुआ है।

घरों का पानी सड़क पर गिरने से पीसीसी पथ पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है।ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल होते हैं, स्कूली बच्चे रोज़ इस गंदे पानी में फिसलते हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के जरिए कई बार शिकायत की गई, पर हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।सूचना मिलने पर मुखिया ललन रजक, राजस्व कर्मचारी और राजपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। लंबी मशक्कत के बाद शाम पांच बजे प्रशासन की पहल पर जाम हटाया गया।

तत्काल जेसीबी मंगाकर सड़क किनारे गड्ढा खोदा गया और नाली निर्माण का भरोसा दिया गया।हालांकि ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक होगा। यह घटना सवाल छोड़ गई है—क्या हर बार हादसे और सड़क जाम के बाद ही प्रशासन जागेगा।
