महारानी उषारानी बालिका विद्यालय में संविधान दिवस पर आयोजित हुआ जागरूकता शिविर,

महारानी उषारानी बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय, डुमरांव में मंगलवार को भारतीय संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर छात्राओं को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष हर्षित सिंह तथा अवर न्यायाधीश सह सचिव नेहा दयाल के निर्देशन में पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव और पीएलवी अनिशा भारती ने छात्राओं को संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, कर्तव्य तथा शिक्षा के अधिकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

महारानी उषारानी बालिका विद्यालय में संविधान दिवस पर आयोजित हुआ जागरूकता शिविर,

-- जिला व विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशन में प्रस्तावना, मौलिक अधिकार-कर्तव्य व शिक्षा के अधिकार पर हुई विस्तृत चर्चा

केटी न्यूज/डुमरांव

महारानी उषारानी बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय, डुमरांव में मंगलवार को भारतीय संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर छात्राओं को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष हर्षित सिंह तथा अवर न्यायाधीश सह सचिव नेहा दयाल के निर्देशन में पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव और पीएलवी अनिशा भारती ने छात्राओं को संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, कर्तव्य तथा शिक्षा के अधिकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य सचिन्द्र कुमार तिवारी, सुनील कुमार, जितेन्द्र मिश्रा, रवि प्रभात, विमल कुमार, रीना कुमारी, पल्लवी यादव, वी.के, गायत्री कुमारी, अजय कुमार सहित कई शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे। छात्राओं में कार्यक्रम को लेकर उत्साह देखने लायक था। प्राचार्य सचिन्द्र तिवारी ने कहा कि छात्राओं ने संविधान संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां रोचक तरीके से सीखी हैं, जिससे उनमें जागरूकता बढ़ेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य एवं संचालन सुनील कुमार ने किया।

पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव ने प्रस्तावना को संविधान का “परिचय-पत्र” बताते हुए कहा कि यह भारत के प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता और समानता की गारंटी देती है। उन्होंने बताया कि मौलिक कर्तव्य नागरिकों में देशभक्ति और राष्ट्रीय मूल्यों को प्रोत्साहित करते हैं। 1976 के 42वें संविधान संशोधन और बाद में 2002 के संशोधन से कर्तव्यों की सूची में विस्तार किया गया, जिसमें तीन शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता विशेष रूप से जोड़े गए। अनुच्छेद 51(ए) में कुल 11 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है।

शिक्षा के अधिकार पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के भाग-4 में अनुच्छेद 45 और 39(एफ) में राज्य को वित्तपोषित शिक्षा का प्रावधान है। 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्नीकृष्णन केस में शिक्षा को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना। इसके बाद 2002 के 86वें संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद 21ए जोड़ा गया, जिसके आधार पर 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू किया गया।पीएलवी अनिशा भारती ने छात्राओं को बताया कि आरटीई एक्ट 2009 प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य और निःशुल्क बनाता है। यह निजी ट्यूशन, अवैध स्कूलों, स्क्रीनिंग प्रक्रिया, अतिरिक्त शुल्क तथा बच्चों के मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न पर भी रोक लगाता है।