डुमरांव के लकी राज और श्रेयस श्रीवास्तव ने जेईई मेंस 2026 में लहराया परचम

डुमरांव और पुराना भोजपुर की धरती एक बार फिर मेधावी प्रतिभाओं की गूंज से गौरवान्वित हुई है। 17 वर्षीय लकी राज और श्रेयस श्रीवास्तव ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा ज्वाइंट एंट्रेंस एक्जामिनेशन मेन 2026 में क्रमशः 99.634 और 97.66 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है। दोनों विद्यार्थियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

डुमरांव के लकी राज और श्रेयस श्रीवास्तव ने जेईई मेंस 2026 में लहराया परचम

-- 99.634 और 97.66 पर्सेंटाइल के साथ जिले का गौरव बढ़ाया, मेहनत-संस्कार और लक्ष्य ने रची सफलता की कहानी

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव और पुराना भोजपुर की धरती एक बार फिर मेधावी प्रतिभाओं की गूंज से गौरवान्वित हुई है। 17 वर्षीय लकी राज और श्रेयस श्रीवास्तव ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा ज्वाइंट एंट्रेंस एक्जामिनेशन मेन 2026 में क्रमशः 99.634 और 97.66 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है। दोनों विद्यार्थियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।पुराना भोजपुर निवासी लकी राज शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डुमरांव से प्राप्त की और दसवीं की परीक्षा में 95.24 प्रतिशत अंक हासिल किए। गणित विषय में शत-प्रतिशत अंक (100 में 100) प्राप्त कर उन्होंने अपनी असाधारण क्षमता का परिचय दिया।

इस उपलब्धि पर विद्यालय ने उन्हें दो बार सम्मानित किया और शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजा। उच्च स्तरीय तैयारी के लिए उन्होंने कोटा का रुख किया, जहां निरंतर परिश्रम और अनुशासन के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। लकी का सपना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से कंप्यूटर विज्ञान में अध्ययन कर निजी क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है।वहीं, डुमरांव के मूल निवासी और वर्तमान में बेंगलुरु में रह रहे श्रेयस श्रीवास्तव ने 97.66 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त कर जेईई एडवांस के लिए भी योग्यता अर्जित की है। विज्ञान और गणित में विशेष रुचि रखने वाले श्रेयस ने माध्यमिक स्तर से ही विभिन्न शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

वर्ष 2024 में शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए उन्हें कर्नाटक सरकार के राजस्व मंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया था। उनके पिता संजय श्रीवास्तव भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त जूनियर कमीशंड अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत सरकार के संचार मंत्रालय में कार्यरत हैं। सैन्य अनुशासन और पारिवारिक संस्कारों ने श्रेयस के व्यक्तित्व को मजबूती प्रदान की है। उनका लक्ष्य जेईई एडवांस में बेहतर रैंक प्राप्त कर देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान में अध्ययन करना तथा आगे चलकर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में योगदान देना है।

श्रेयस की छोटी बहन शानवी श्रीवास्तव ने भी कम उम्र में गणित के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जटिल गणितीय सूत्रों के स्मरण और शुद्ध उच्चारण के आधार पर उनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हो चुका है।लकी और श्रेयस की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बक्सर जिले के लिए प्रेरणा है। इन दोनों विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया है कि लक्ष्य स्पष्ट हो, मार्गदर्शन सही हो और परिश्रम निरंतर हो, तो सफलता निश्चित है। डुमरांव की यह दोहरी उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास का नया अध्याय लिख रही है।