विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर जागरूकता और सहयोग बढ़ाने की अपील
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर पीडब्ल्यूडी संघ, बिहार के राज्य मीडिया प्रभारी लालू तुरहा ने लोगों से ऑटिज्म के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन और उचित सहयोग मिलना अत्यंत जरूरी है।
केटी न्यूज/चक्की
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर पीडब्ल्यूडी संघ, बिहार के राज्य मीडिया प्रभारी लालू तुरहा ने लोगों से ऑटिज्म के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन और उचित सहयोग मिलना अत्यंत जरूरी है।उन्होंने बताया कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार एक तंत्रिका-विकास संबंधी स्थिति है, जो बच्चों के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है। इसके कारण बच्चों की बोलने, समझने, सामाजिक व्यवहार और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके लक्षण सामान्यतः डेढ़ वर्ष से तीन वर्ष की उम्र के बीच दिखाई देने लगते हैं।

जैसे नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, आंखों से संपर्क न बनाना, बोलने में देरी या शब्दों को दोहराना और अकेले रहना पसंद करना।ऑटिज्म के संभावित कारणों में आनुवंशिक कारक, गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी, समय से पहले जन्म, पर्यावरणीय प्रभाव तथा मस्तिष्क के विकास में असामान्यता शामिल हैं। यह एक बहु-कारक स्थिति है।उन्होंने रोकथाम और प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि गर्भावस्था में उचित देखभाल, बच्चों के विकास की नियमित निगरानी, प्रारंभिक पहचान, वाणी एवं व्यवहार चिकित्सा तथा परिवार और समाज का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।

साथ ही छोटे बच्चों को मोबाइल, टैबलेट, टीवी और वीडियो गेम जैसे उपकरणों से दूर रखने या सीमित उपयोग की सलाह दी गई।लालू तुरहा ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि जागरूकता अभियान को पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाए तथा प्रत्येक प्रखंड में जांच और परामर्श केंद्र स्थापित किए जाएं।उन्होंने कहा, “ऑटिज्म कोई कमजोरी नहीं, बल्कि अलग तरह की क्षमता है। जरूरत है इन्हें समझने और आगे बढ़ाने की।”समाज से अपील की गई कि भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान और सहयोग का भाव अपनाएं, क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान है।

