गंगा किनारे जागरूकता की अलख: 322वें रविवार को युवाओं ने दिया स्वच्छता का संदेश

चौसा में मां गंगा की स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में एक अनूठी पहल लगातार मिसाल पेश कर रही है। 322वें रविवार को भी गंगा तट पर युवाओं की टीम ने सफाई के साथ-साथ जागरूकता का संदेश फैलाया। यह अभियान केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने की कोशिश बन चुका है।

गंगा किनारे जागरूकता की अलख: 322वें रविवार को युवाओं ने दिया स्वच्छता का संदेश

-- सात वर्षों से निरंतर चल रहा अभियान, बाजार घाट पर श्रद्धालुओं को भी किया प्रेरित

केटी न्यूज/चौसा

चौसा में मां गंगा की स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में एक अनूठी पहल लगातार मिसाल पेश कर रही है। 322वें रविवार को भी गंगा तट पर युवाओं की टीम ने सफाई के साथ-साथ जागरूकता का संदेश फैलाया। यह अभियान केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने की कोशिश बन चुका है।रविवार सुबह ठीक सात बजे गंगा युवा समिति, चौसा बक्सर के सदस्य बाजार घाट पर एकत्रित हुए। संयोजक भरत पांडेय के नेतृत्व में टीम ने घाट और तटवर्ती इलाके में फैले प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को एकत्र कर साफ-सफाई की।

सफाई के दौरान स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं से भी संवाद स्थापित किया गया और उन्हें गंगा तट को स्वच्छ बनाए रखने की शपथ दिलाई गई।अभियान की खास बात इसकी निरंतरता है। पिछले सात वर्षों से अधिक समय से हर रविवार बिना रुके यह पहल जारी है। भरत पांडेय ने बताया कि उनका लक्ष्य केवल एक दिन की सफाई नहीं, बल्कि लोगों के मन में स्थायी स्वच्छता संस्कार विकसित करना है। उन्होंने कहा कि जब तक आमजन स्वयं जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक किसी भी नदी को पूरी तरह स्वच्छ नहीं रखा जा सकता।सफाई के दौरान समिति के सदस्यों ने घाट पर लगे कचरा पात्रों के उपयोग पर जोर दिया और श्रद्धालुओं से पूजा सामग्री निर्धारित स्थान पर ही डालने की अपील की।

युवाओं ने यह भी कहा कि गंगा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवनदायिनी धारा है, जिसकी स्वच्छता हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।इस मौके पर मन्नू पांडेय, राधेश्याम चौधरी, मंगलदेव पासवान, राधेश्याम मद्धेशिया, पिंटू चौधरी और जियूत चौधरी सहित कई कार्यकर्ता सक्रिय रूप से मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने भी इस प्रयास की सराहना की और भविष्य में अभियान से जुड़ने की इच्छा जताई।लगातार 322 सप्ताह तक बिना रुके चलने वाला यह अभियान अब चौसा की पहचान बनता जा रहा है, जहां हर रविवार गंगा तट पर सफाई के साथ एक नई सोच की शुरुआत होती है।