बैंक बंद, जनता बेहाल: बक्सर में हड़ताल ने थाम दी आर्थिक रफ्तार
बक्सर जिले में मंगलवार को बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स द्वारा घोषित देशव्यापी हड़ताल का सीधा असर यह रहा कि जिले के सभी 146 बैंक और अधिकांश एटीएम बंद रहे। नतीजा, सुबह से ही बैंकों के बाहर लोगों की भीड़, गुस्सा और बेबसी साफ दिखी। जरूरी काम लेकर बैंक पहुंचे उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा।
-- यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स की देशव्यापी हड़ताल का सीधा असर, 146 बैंक ठप, करोड़ों का लेन-देन अटका
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर जिले में मंगलवार को बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स द्वारा घोषित देशव्यापी हड़ताल का सीधा असर यह रहा कि जिले के सभी 146 बैंक और अधिकांश एटीएम बंद रहे। नतीजा, सुबह से ही बैंकों के बाहर लोगों की भीड़, गुस्सा और बेबसी साफ दिखी। जरूरी काम लेकर बैंक पहुंचे उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा।हड़ताल की जानकारी के अभाव में डुमरांव नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पर पहुंचे ग्राहक रामाकांत पांडेय, दिवाकर यादव और उमेश्वर सिंह ने बताया कि पिछले तीन दिनों से बैंक बंद थे, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि मंगलवार को कामकाज शुरू होगा।लेकिन बैंक पहुंचने पर पता चला कि हड़ताल के कारण आज भी कोई काम नहीं हो रहा है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।

बैंक बंद रहने का सबसे बड़ा असर आम जनता और छोटे कारोबारियों पर पड़ा। स्थानीय निवासी संदीप कुमार ने बताया कि उन्हें बैंक से पैसे ट्रांसफर कराने थे, लेकिन हड़ताल के कारण यह संभव नहीं हो सका। वहीं कई ग्राहक अपने खाते की केवाईसी अपडेट कराने पहुंचे थे, उनका काम भी ठप हो गया। मजदूरी, पेंशन, छात्रवृत्ति, व्यापारिक भुगतान, सब कुछ एक दिन में ही रुक गया।जिले में एक दिन बैंकिंग गतिविधियां ठप रहने से करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि नकदी की किल्लत से बाजार की रफ्तार थम गई है। खासकर छोटे दुकानदार, किसान और दैनिक जरूरतों से जुड़े लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

-- हड़ताल की वजह क्या है
बैंक यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन से लंबे समय से कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। यूनियनों की प्रमुख मांग है कि अन्य सरकारी विभागों की तरह बैंकों में भी पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाए ताकि कर्मचारियों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिल सके।यूनियन नेताओं का साफ कहना है कि बैंक कर्मचारी लगातार बढ़ते काम के दबाव में काम कर रहे हैं। डिजिटल बैंकिंग, लक्ष्य आधारित काम और स्टाफ की कमी के बावजूद सुविधाओं में कोई सुधार नहीं किया गया।

ऐसे में यह हड़ताल कर्मचारियों की मजबूरी है, न कि उनकी जिद। -- आगे और बढ़ेगा आंदोलनयूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता भी अपनाया जाएगा। इसका सीधा नुकसान फिर आम जनता को ही उठाना पड़ेगा।फिलहाल बक्सर में हालात यह हैं कि बैंक बंद हैं, एटीएम सूखे पड़े हैं और आम लोग सिस्टम के बीच पिस रहे हैं। सवाल यह है कि सरकार और बैंक प्रबंधन कब तक इस टकराव को नजरअंदाज करेंगे और कब जनता को राहत मिलेगी।

