चलती ट्रेन, छूटे दो लाख और आरपीएफ की रफ्तार: भरोसे की पटरी पर लौटा यात्री का सबकुछ

बक्सर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) की तत्परता और ईमानदारी पर मुहर लगा दी। मामला गाड़ी संख्या 15658 ब्रह्मपुत्र मेल का है, जहां एक यात्री के लाखों रुपये और जरूरी सामान से भरे बैग ट्रेन में छूट गए, लेकिन मिनटों में कहानी का रुख बदल गया।

चलती ट्रेन, छूटे दो लाख और आरपीएफ की रफ्तार: भरोसे की पटरी पर लौटा यात्री का सबकुछ

केटी न्यूज/बक्सर 

बक्सर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) की तत्परता और ईमानदारी पर मुहर लगा दी। मामला गाड़ी संख्या 15658 ब्रह्मपुत्र मेल का है, जहां एक यात्री के लाखों रुपये और जरूरी सामान से भरे बैग ट्रेन में छूट गए, लेकिन मिनटों में कहानी का रुख बदल गया।सुरक्षा नियंत्रण कक्ष दानापुर से रेल मदद के जरिए मिली सूचना के अनुसार कोच एच-1, बर्थ नंबर 13 पर रखे दो ट्रॉली बैग और एक पिठू बैग आरा स्टेशन पर पीछे रह गए यात्री के थे। यात्री पानी लेने उतरे थे, इसी बीच ट्रेन खुल गई और वे चढ़ नहीं पाए।

आमतौर पर ऐसी स्थितियां यात्रियों के लिए भारी नुकसान में बदल जाती हैं, लेकिन इस बार आरपीएफ बक्सर की मुस्तैदी ने नुकसान को भरोसे में बदल दिया।सूचना मिलते ही आरपीएफ पोस्ट बक्सर हरकत में आई। ट्रेन के बक्सर पहुंचते ही अधिकारियों और जवानों ने संबंधित कोच को अटेंड किया और बर्थ नंबर 13 से तीनों बैग सुरक्षित उतार लिए। तत्पश्चात पहचान सुनिश्चित कर यात्री को सूचना दी गई। यात्री की पहचान सब्बाज खान (66 वर्ष), निवासी नगांव, असम के रूप में हुई।यात्री के आरपीएफ पोस्ट पहुंचने पर विधिवत प्रक्रिया के तहत बैग खोले गए।

जांच में दोनों ट्रॉली बैग से 500 के नोटों की चार-चार गड्डियां कुल 2 लाख नगद—के साथ कपड़े, जरूरी दवाइयां और करीब ₹30 हजार मूल्य का अन्य सामान बरामद हुआ। सब कुछ सही सलामत पाए जाने पर सामान यात्री को सौंप दिया गया।इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व निरीक्षक प्रभारी कुंदन कुमार ने किया, जिनके साथ उप निरीक्षक दिनेश चौधरी, उप निरीक्षक विजेंद्र मुवाल, सहायक उप निरीक्षक नंदलाल राम और आरक्षी बी.के. सिंह शामिल रहे।घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आरपीएफ की सतर्कता और कर्तव्यनिष्ठा यात्रियों के भरोसे की सबसे मजबूत पटरी है—जहां मुश्किल वक्त में सुरक्षा सिर्फ दावा नहीं, काम बनकर सामने आती है।