धान अधिप्राप्ति की सुस्त रफ्तार पर डीडीसी सख्त, लापरवाह अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

जिले में धान अधिप्राप्ति की धीमी प्रगति को लेकर उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने कड़ा रुख अपनाया है। समाहरणालय परिसर स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में किसी भी तरह की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा के दौरान डुमरांव एवं इटाढ़ी प्रखंडों का धान क्रय प्रतिशत जिले के औसत से काफी कम पाया गया, जबकि ब्रह्मपुर प्रखंड में किसानों के भुगतान की स्थिति मात्र 89.66 प्रतिशत रही।

धान अधिप्राप्ति की सुस्त रफ्तार पर डीडीसी सख्त, लापरवाह अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

-- डुमरांव व इटाढ़ी का क्रय प्रतिशत औसत से नीचे, भुगतान व एफआरसी संकट से बाधित हुई खरीद प्रक्रिया

केटी न्यूज/बक्सर

जिले में धान अधिप्राप्ति की धीमी प्रगति को लेकर उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने कड़ा रुख अपनाया है। समाहरणालय परिसर स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में किसी भी तरह की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा के दौरान डुमरांव एवं इटाढ़ी प्रखंडों का धान क्रय प्रतिशत जिले के औसत से काफी कम पाया गया, जबकि ब्रह्मपुर प्रखंड में किसानों के भुगतान की स्थिति मात्र 89.66 प्रतिशत रही।बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 7164 किसानों से कुल 61,407.33 मैट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की जा चुकी है, जो जिले को प्राप्त लक्ष्य का केवल 47.53 प्रतिशत है। वहीं 6760 मैट्रिक टन चावल (सीएमआर) की आपूर्ति राज्य खाद्य निगम को की गई है।

इन आंकड़ों को संतोषजनक नहीं मानते हुए डीडीसी ने प्रगति में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।प्रगति कम होने और कार्य में लापरवाही बरतने पर डुमरांव अनुमंडल के सभी प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया। इसके साथ ही धान अधिप्राप्ति में व्यक्तिगत रुचि नहीं लेने के आरोप में जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर को भी स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया।बैठक के दौरान सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों ने फोर्टिफाइड राइस कर्नेल की कमी तथा समितियों द्वारा राज्य खाद्य निगम को आपूर्ति किए गए सीएमआर का भुगतान लंबित रहने की समस्या को प्रमुख कारण बताया। अधिकारियों ने कहा कि भुगतान में देरी से धान अधिप्राप्ति की चक्रीय व्यवस्था बाधित हो रही है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।

डीडीसी निहारिका छवि ने सभी प्रखंडों के सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि छोटे और सीमान्त किसानों से प्राथमिकता के आधार पर धान अधिप्राप्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम को एफआरसी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और सीएमआर भुगतान में तेजी लाने का आदेश दिया गया।उन्होंने यह भी कहा कि धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसानों की समस्याओं का त्वरित निष्पादन किया जाए। बैठक में विशेष कार्य पदाधिकारी, वरीय उप समाहर्ता, जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।